Zidane बने France के मुख्य कोच 2026
28 जुलाई 2026 को Zidane को France राष्ट्रीय टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया है। वे Didier Deschamps की जगह लेंगे जिनके tenure में टीम FIFA World Cup 2026 के semifinal में हार गई। यह खबर भारत में फुटबॉल vs क्रिकेट की बहस को फिर से चरम पर ले आई है।

जुलाई 1998 में फ्रांस की जर्सी पहने जिदान ने विश्व कप फाइनल में दो गोल कर देश को चैंपियन बनाया था। 28 जुलाई 2026 को उसी जिदान को फ्रांस का मुख्य कोच यानी टीम का मुख्य ट्रेनर नियुक्त कर दिया गया है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार जिदान को फ्रांस राष्ट्रीय टीम का मुख्य कोच बनाया गया है। वे दिदिएर देसचांप्स की जगह लेंगे जिनके कार्यकाल में टीम फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गई थी। यह खबर भारतीय फुटबॉल के लिए भी अहम है क्योंकि यह दिखाती है कि दुनिया के टॉप देश अपने पूर्व सुपरस्टार खिलाड़ियों को मौका देते हैं जबकि भारत में ऐसे ग्लोबल आइकॉन की कमी फुटबॉल की ग्रोथ को रोक रही है। युवा खिलाड़ी और फैंस दोनों इससे प्रभावित होते हैं। आगे यह रिपोर्ट बताएगी कि यह नियुक्ति भारत में फुटबॉल बनाम क्रिकेट की खाई को कैसे और चौड़ा करती है।
जिदान बने फ्रांस के मुख्य कोच
28 जुलाई 2026 को मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिदान को फ्रांस का नया मुख्य कोच नियुक्त किया गया। वे पूर्व रियल मैड्रिड मैनेजर हैं और एक पूर्व सुपरस्टार खिलाड़ी भी। यह फैसला फीफा विश्व कप 2026 के बाद लिया गया जहां फ्रांस टीम सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गई थी। दिदिएर देसचांप्स 2022 से 2026 तक मुख्य कोच रहे। उनके नेतृत्व में टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन इस बार सेमीफाइनल एग्जिट काफी कड़वा रहा। अधिकारियों ने बताया कि जिदान का अनुभव और नाम टीम को नई दिशा दे सकता है।
जिदान के पास खिलाड़ी के रूप में विश्व कप जीतने का रिकॉर्ड है। वे रियल मैड्रिड को कई चैंपियंस लीग जितवा चुके हैं। अब वे कोच के तौर पर फ्रांस को फिर से टॉप पर लाने की कोशिश करेंगे। यह खबर फ्रांस में काफी चर्चा में है। फुटबॉल प्रेमी उम्मीद कर रहे हैं कि जिदान की वापसी टीम को नई ऊर्जा देगी। लेकिन भारत में यह घटना दूसरा सवाल उठाती है।
असली समस्या क्या है
जिदान जैसी वैश्विक हस्ती का फ्रांस टीम में आना भारत में फुटबॉल की कमी को उजागर करता है। हमारे यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐसे आइकॉन नहीं हैं जो युवाओं को प्रेरित करें। नतीजा यह कि फुटबॉल क्रिकेट के मुकाबले बहुत पीछे रह जाता है। बिना घरेलू या ग्लोबल स्टार्स के युवा खिलाड़ियों को रोल मॉडल नहीं मिलता। इससे खेल का विकास रुक जाता है। फैंस भी कम मैच देखते हैं, मीडिया कवरेज कम होता है और उत्साह घटता है। यही वजह है कि करोड़ों युवा क्रिकेट की तरफ मुड़ जाते हैं।
भारतीय फुटबॉल को मजबूत बनाने के लिए ऐसे आइकॉन जरूरी हैं। जिदान की नियुक्ति हमें याद दिलाती है कि दुनिया कैसे पूर्व खिलाड़ियों को मौका देती है। भारत में यह कमी युवाओं के सपनों और करियर को प्रभावित करती है।

आंकड़े क्या कहते हैं
भारत में बेरोजगारी की स्थिति फुटबॉल जैसे खेलों की कमजोर स्थिति को और बदतर बनाती है। वर्ष 2025 में भारत का कुल बेरोजगारी दर 4.22% रहा। इसका मतलब है कि श्रम बल का करीब 4.22 फीसदी हिस्सा काम की तलाश में है लेकिन नहीं पा रहा। इससे भी ज्यादा चिंता की बात युवाओं की स्थिति है। इसका मतलब है कि हर छह में से एक युवा जो काम करना चाहता है उसे नौकरी नहीं मिल पाती।
महिलाओं की भागीदारी भी कम है। वर्ष 2025 में महिला लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 32.42% रहा। इसका मतलब है कि तीन में से सिर्फ एक महिला या तो काम कर रही है या सक्रिय रूप से नौकरी ढूंढ रही है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि जब खेल क्षेत्र में रोल मॉडल नहीं होते तो युवा रोजगार के मौके भी गंवा देते हैं। फुटबॉल में ग्लोबल आइकॉन की कमी युवाओं को प्रोफेशनल करियर चुनने से रोकती है। नतीजा यह कि बेरोजगारी बढ़ती है और खेल का विकास रुक जाता है।
यह क्यों हुआ — बैकग्राउंड
फ्रांस ने हमेशा अपने पूर्व खिलाड़ियों को कोचिंग भूमिका दी है। जिदान खुद 1998 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा थे। उन्होंने बाद में रियल मैड्रिड को सफलता दिलाई। इसलिए उनका फ्रांस टीम में आना स्वाभाविक लगता है। दूसरी तरफ भारत में फुटबॉल का इतिहास अलग रहा। क्रिकेट ने सबका ध्यान खींच लिया। 1983 विश्व कप जीत के बाद क्रिकेट स्टार्स ने पूरा देश जोड़ दिया। फुटबॉल में ऐसा कोई बड़ा पल नहीं आया।
एक रोजमर्रा की तुलना से समझें। जैसे कोई बच्चा अगर पड़ोस में क्रिकेट का स्टार देखता है तो उसकी तरफ जाता है। लेकिन फुटबॉल के लिए ऐसा स्टार भारत में कम है। यही वजह है कि युवा क्रिकेट चुनते हैं। फीफा विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में भारत की टीम कभी नहीं पहुंची। जबकि फ्रांस ने कई बार खिताब जीता। जिदान की नियुक्ति इसी सफलता की कहानी को आगे बढ़ाती है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार पूर्व सुपरस्टार खिलाड़ी जिदान दिदिएर देसचांप्स की जगह लेंगे।
भारत पर असर
जिदान की नियुक्ति भारतीय युवा फुटबॉल खिलाड़ियों पर सीधा असर डालती है। उन्हें प्रेरणा नहीं मिलती तो वे खेल छोड़ देते हैं। नतीजा यह कि नौकरियां कम बनती हैं। फैंस को भी कम रोमांच मिलता है। हाई प्रोफाइल मैच कम होते हैं तो टीवी पर फुटबॉल कम दिखता है। इससे खेल का उत्साह घटता है। युवा एथलीट्स को प्रोफेशनल बनने में ज्यादा मुश्किल आती है।
अगर भारत में जिदान जैसे आइकॉन होते तो लाखों युवाओं को करियर का रास्ता मिलता। बेरोजगारी 16.02% (2025) जैसी समस्या भी कुछ हद तक कम हो सकती थी। लेकिन फिलहाल फुटबॉल क्रिकेट से बहुत पीछे है। महिलाओं की भागीदारी 32.42% (2025) रहने का एक कारण भी यही है। खेल क्षेत्र में कम रोल मॉडल होने से महिलाएं कम आकर्षित होती हैं।
दूसरा पक्ष
कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि समस्या सिर्फ आइकॉन की कमी नहीं है। बुनियादी सुविधाएं, कोचिंग और लीग की कमी भी बड़ी वजह है। जिदान जैसे स्टार भारत में पैदा होना मुश्किल है क्योंकि सिस्टम ही कमजोर है। क्रिकेट की सफलता को देखते हुए सरकार और निजी क्षेत्र उस पर ज्यादा फोकस करते हैं। फुटबॉल में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। सिर्फ एक स्टार आने से सब ठीक नहीं हो जाएगा।
इसके अलावा कई युवा अभी भी फुटबॉल खेल रहे हैं। लोकल अकादमियां चल रही हैं। अगर सही प्लानिंग हो तो भविष्य में बदलाव आ सकता है। जिदान की कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत और सिस्टम से कुछ भी संभव है।
आगे क्या
अगले कुछ हफ्तों में फ्रांस टीम जिदान के नेतृत्व में नई तैयारियां शुरू करेगी। वे किस खिलाड़ी को कितना मौका देते हैं यह देखना दिलचस्प होगा। भारत में फुटबॉल फेडरेशन को इस घटना से सबक लेना चाहिए। युवा कार्यक्रमों में निवेश बढ़ाना होगा। अगर 2026 के बाद कोई बड़ा टूर्नामेंट आता है तो तैयारी पहले से शुरू करनी होगी।
युवा खिलाड़ी अब खुद को और मेहनत करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। लेकिन बिना बड़े बदलाव के फुटबॉल क्रिकेट को नहीं पछाड़ पाएगा। आने वाले महीनों में देखना होगा कि भारत इस गैप को कम करने के लिए क्या कदम उठाता है।
मुख्य बातें
- 28 जुलाई 2026 को जिदान को फ्रांस का मुख्य कोच बनाया गया। वे दिदिएर देसचांप्स की जगह लेंगे जिनकी टीम सेमीफाइनल में हार गई थी।
- यह खबर भारत में फुटबॉल की समस्या दिखाती है जहां ग्लोबल आइकॉन की कमी से खेल का विकास रुक रहा है।
- 2025 में युवा बेरोजगारी 16.02% रही। इसका मतलब हर छह युवाओं में एक को काम नहीं मिलता।
- भारतीय युवाओं को रोल मॉडल की जरूरत है वरना फुटबॉल क्रिकेट से हमेशा पीछे रहेगा।
निष्कर्ष
जिदान की नियुक्ति फ्रांस को नई उम्मीद दे रही है लेकिन भारत के लिए यह एक चेतावनी है। ग्लोबल आइकॉन के बिना फुटबॉल आगे नहीं बढ़ पाता। बेरोजगारी के आंकड़े 4.22% कुल और 16.02% युवा स्तर पर दिखाते हैं कि कितने युवा सपने अधूरे रह जाते हैं। महिला भागीदारी महज 32.42% रहने का भी यही कारण है।
1998 के उस विश्व कप विजेता जिदान की वापसी हमें याद दिलाती है कि सही मौका मिले तो पूर्व खिलाड़ी देश का गौरव बढ़ा सकते हैं। भारत में भी अगर ऐसे स्टार उभरें तो लाखों युवाओं की जिंदगी बदल सकती है। अगले साल फुटबॉल लीग के नए सीजन में देखना होगा कि घरेलू स्टार्स कितने उभरते हैं।
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