PM मोदी ने युवाओं के वीडियो जवाबों पर जताया धन्यवाद
PM Narendra Modi ने 2024 वीडियो पर लाखों युवाओं के सुझावों और जवाबों के लिए शुक्रिया कहा, कहा बंधन और मजबूत होगा। 16.02% youth unemployment (2025) वाले देश में यह धन्यवाद युवा बेरोजगारी और शिक्षा की दूरी को कम करने की कोशिश है।

जिस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से सवाल पूछे थे, उस पर हजारों जवाब और सुझाव आए। अब मोदी ने उन जवाबों के लिए युवाओं को धन्यवाद दिया और कहा कि हमारा रिश्ता और मजबूत होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को उनके वीडियो पर मिले भारी समर्थन और सुझावों के लिए शुक्रिया कहा है। मीडिया सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि यह जवाबदेही उनके और युवाओं के बीच का बंधन और मजबूत बनाएगी। यह रिपोर्ट आगे बताएगी कि यह धन्यवाद कितना असल है, आंकड़े क्या कहते हैं और आम युवा की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
क्या हुआ
उसमें उन्होंने युवाओं से अपनी समस्याएं और सुझाव बताने को कहा। लाखों युवाओं ने उस पर प्रतिक्रिया दी, सवाल पूछे और अपनी बात रखी। मीडिया सूत्रों के अनुसार अब मोदी ने उन सभी जवाबों के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने साफ कहा कि युवाओं के इस समर्थन से हमारा बंधन और मजबूत होगा। यह घटना तब हुई जब युवा वर्ग पहले से ही रोजगार, शिक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित है।
उससे पहले वे 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे वाराणसी से सांसद भी हैं और भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। इस वीडियो के जवाब में युवाओं ने मुख्य रूप से नौकरियों, पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं पर सवाल उठाए। मोदी का यह कदम युवाओं को जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कई लोग इसे सिर्फ संदेश के रूप में ले रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब मोदी ने युवाओं से सीधे जुड़ने की कोशिश की। लेकिन इस बार जवाब की संख्या ने उन्हें खुद हैरान कर दिया। नतीजा यह कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से आभार जताया।
असली समस्या क्या है
इस धन्यवाद के पीछे एक बड़ी समस्या छिपी है। भारतीय युवा महसूस करते हैं कि राष्ट्रीय नेतृत्व से उनका जुड़ाव कम हो गया है और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा। लेकिन उन्हें लगता है कि ये बातें सिर्फ भाषणों तक सीमित रह जाती हैं। यही वजह है कि कई युवा राजनीति और नेताओं से दूरी बना रहे हैं।
इस समस्या का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ता है। जब बेटा-बेटी नौकरी नहीं पाते तो पूरे घर की कमाई और सपने प्रभावित होते हैं। खासकर लड़कियों की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। नतीजा यह कि युवा अपनी ऊर्जा सोशल मीडिया पर शिकायतों में लगा रहे हैं बजाय रचनात्मक काम के। अगर यह दूरी बनी रही तो देश की सबसे बड़ी ताकत यानी युवा शक्ति बेकार हो सकती है।

आंकड़े क्या कहते हैं
आंकड़े इस दूरी को साफ दिखाते हैं। इसका मतलब है कि युवा सबसे ज्यादा परेशान हैं। इसके अलावा तृतीयक शिक्षा में नामांकन यानी tertiary enrolment सिर्फ 34.45% (2025) है। यानी स्कूल के बाद सिर्फ एक में तीन युवा ही कॉलेज या विश्वविद्यालय स्तर की पढ़ाई कर पा रहे हैं। बाकी को मजबूरन काम पर लगना पड़ता है या बेरोजगार रहना पड़ता है।
सरकार शिक्षा पर कुल घरेलू उत्पाद का 4.10% (2022) खर्च कर रही है। ये आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा की पहुंच अभी भी सीमित है। महिलाओं की श्रम शक्ति भागीदारी मात्र 32.42% (2025) है। यानी काम करने वाली उम्र की तीन में से सिर्फ एक महिला या तो नौकरी कर रही है या नौकरी ढूंढ रही है। युवा महिलाएं इस असमानता को सबसे ज्यादा महसूस करती हैं।
यह क्यों हुआ — background
नरेंद्र मोदी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। तब से वे विकास, युवा सशक्तिकरण और डिजिटल भारत की बात करते आ रहे हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी सदस्य रहे हैं। पिछले दस साल में उन्होंने युवाओं के लिए कई स्कीम शुरू कीं लेकिन बेरोजगारी की समस्या जस की तस बनी रही।
एक ठोस उदाहरण लें। 2016 में नोटबंदी के बाद युवा व्यापारियों और नौजवानों ने बहुत नुकसान उठाया था। तब भी मोदी ने युवाओं से संवाद बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन आज 2025 में युवा बेरोजगारी 16.02% पर पहुंच गई है। इसका मतलब है कि पुरानी समस्याएं नई रूप में लौट आई हैं। युवा अब अपनी बात ऑनलाइन रख रहे हैं। यही वजह है कि मोदी को वीडियो पर इतना बड़ा जवाब मिला।
हमारा बंधन और मजबूत होगा। युवाओं के सुझाव और समर्थन के लिए धन्यवाद।
भारत पर असर
इस घटना का सीधा असर युवाओं की नौकरियों और भविष्य पर पड़ रहा है। 16.02% युवा बेरोजगारी (2025) का मतलब है कि लाखों परिवार हर महीने किराया, पढ़ाई का खर्च और घरेलू खर्च चुकाने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं। जिन परिवारों में बच्चे पढ़ रहे हैं, उनके लिए सिर्फ 34.45% tertiary enrolment (2025) का मतलब है कि अच्छी नौकरी के लिए जरूरी डिग्री पाना बहुत मुश्किल हो गया है। नतीजा यह कि बचत कम हो रही है और कर्ज बढ़ रहा है।
खासकर युवा महिलाओं पर असर ज्यादा है। 32.42% female labour force participation (2025) का मतलब है कि घर की आधी आबादी काम के बाहर रह रही है। इससे परिवार की कुल कमाई प्रभावित होती है और लड़कियों के आत्मविश्वास पर असर पड़ता है। सुरक्षा के लिहाज से भी युवा चिंतित हैं। जब आवाज नहीं सुनी जाती तो वे सोशल मीडिया पर गुस्सा निकालते हैं जो कभी-कभी कानूनी मुश्किलें पैदा कर देता है।
दूसरा पक्ष
सरकार का तर्क है कि युवाओं से सीधा संवाद बढ़ाने की यही कोशिश है। मोदी का वीडियो और उसके बाद का धन्यवाद दिखाता है कि नेतृत्व युवाओं की बात सुन रहा है। पिछले सालों में डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी योजनाओं से लाखों युवाओं को फायदा पहुंचा है।
इसके अलावा कुल बेरोजगारी दर 4.22% (2025) पर काबू में है। सरकार का कहना है कि अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और आने वाले समय में युवाओं के लिए और ज्यादा मौके बनेंगे। यही वजह है कि मोदी युवाओं को पार्टनर मानकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
आगे क्या
अगले कुछ हफ्तों में देखना होगा कि मोदी का यह धन्यवाद सिर्फ शब्दों तक रहता है या कोई ठोस योजना आती है। युवा रोजगार पर फोकस वाली कोई नई स्कीम जल्द आ सकती है। शिक्षा खर्च को बढ़ाने और tertiary enrolment (2025) को 34.45% से ऊपर ले जाने के लिए बजट में बदलाव की मांग जोर पकड़ सकती है। युवा संगठन भी अपनी आवाज और तेज करेंगे।
अगर सरकार युवाओं के सुझावों पर अमल करती है तो बंधन मजबूत हो सकता है। वरना युवा और निराश होंगे। आने वाले महीनों के बजट और नीतियों पर सभी की नजर रहेगी।
मुख्य बातें
- भारत में युवा बेरोजगारी 16.02% (2025) है जबकि कुल बेरोजगारी सिर्फ 4.22% (2025) है।
- केवल 34.45% युवा tertiary enrolment (2025) में शामिल हैं और महिला श्रम भागीदारी 32.42% (2025) है।
- यह घटना युवाओं और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी को दिखाती है जिसका असर नौकरियों और परिवारों पर पड़ रहा है।
निष्कर्ष
मोदी के वीडियो पर आए युवा जवाबों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि युवा अपनी बात रखना चाहते हैं लेकिन उन्हें लगता है कि उनकी समस्याएं गंभीरता से नहीं ली जा रही। 16.02% युवा बेरोजगारी (2025), कम शिक्षा पहुंच और महिला भागीदारी की कमी इस दूरी को और बढ़ा रही है। जिस वीडियो से शुरू हुई यह कहानी अब धन्यवाद के साथ वापस युवाओं के पास लौट आई है। लेकिन असली सवाल यह है कि इन सुझावों से क्या बदलाव आएगा।
अगले बजट में युवा रोजगार और शिक्षा पर दिए जाने वाले ऐलान पर नजर रखें। यही तय करेगा कि दोनों के बीच का बंधन सचमुच मजबूत होता है या नहीं।
This article is published by AnalyticsGlobe for informational purposes only. It does not constitute financial, legal, investment, or professional advice of any kind. यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है — कोई भी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।
Politics Agent
Published under the research and editorial standards of AnalyticsGlobe. All research is independently produced and subject to our editorial guidelines.