NEET पेपर लीक से NDA घरेलू आधार में Gen Z dissent
NEET पेपर लीक के बाद NDA समर्थक परिवारों में Gen Z छात्र सवाल उठा रहे हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ युवा बेरोजगारी 16.02% (2025) और tertiary enrolment सिर्फ 34.45% होने से असंतोष बढ़ रहा है।

लेकिन इस साल पेपर लीक होने के बाद उसके घर में NDA के समर्थक माता-पिता भी अब सरकार से सवाल पूछ रहे हैं।
राष्ट्रीय डेमोक्रेटिक एलायंस यानी NDA, जो BJP के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ गठबंधन है, अपने घरेलू आधार में Gen Z यानी 1990 के अंत से 2010 के शुरुआत तक जन्मे युवा छात्रों के बीच पहली बार साफ असंतोष देख रहा है। मीडिया सूत्रों के अनुसार NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में छात्रों की मांग बढ़ रही है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। यह dissent NDA के अपने युवा वोटरों में आ रहा है, जो अब उच्च शिक्षा में निष्पक्ष पहुंच की कमी से भरोसा खो रहे हैं। कहानी यह दिखाएगी कि कैसे एक परीक्षा का मुद्दा राजनीतिक घर में भी तनाव पैदा कर रहा है।
क्या हुआ
इस साल NEET परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे। छात्रों ने देश भर में प्रदर्शन शुरू किए। वे NEET में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। मीडिया सूत्रों के अनुसार कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। यह असंतोष NDA के अपने घरेलू आधार में फैल रहा है। कई Gen Z छात्र ऐसे परिवारों से आते हैं जो पारंपरिक रूप से NDA का समर्थन करते रहे हैं। लेकिन अब वे कह रहे हैं कि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है। इसका मतलब है कि मेडिकल में दाखिले का सपना कई के लिए टूट रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिर भी छात्रों का गुस्सा कम नहीं हो रहा। पिछले कुछ हफ्तों में कई शहरों में प्रदर्शन हुए। युवा Gen Z वोटर अब सोशल मीडिया पर भी अपनी बात रख रहे हैं। नतीजा यह कि NDA के अंदर ही Gen Z dissent दिखने लगा है। यह पहली बार है जब सत्तारूढ़ गठबंधन के युवा समर्थक इस स्तर पर सड़क पर उतरे हैं। हालांकि अभी यह छोटा रूप है, लेकिन यह राजनीतिक घर में तनाव पैदा कर रहा है।
असली समस्या क्या है
Gen Z छात्रों को उच्च शिक्षा और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्ष पहुंच नहीं मिल रही। यही समस्या NDA के घर में dissent पैदा कर रही है। NEET राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा है, जो मेडिकल और संबंधित कोर्स में दाखिले के लिए मुख्य परीक्षा है। छात्रों का कहना है कि पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों से गरीब और मेहनती बच्चे पीछे रह जाते हैं। इससे सरकारी संस्थाओं और राजनीतिक दलों पर भरोसा घट रहा है। परिवारों में भी बहस हो रही है क्योंकि माता-पिता NDA समर्थक हैं लेकिन बच्चे सवाल उठा रहे हैं।
यह आम आदमी के लिए इसलिए मायने रखता है क्योंकि हर साल लाखों बच्चे इन परीक्षाओं पर अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगाते हैं। अगर सिस्टम में गड़बड़ी है तो उनका भविष्य प्रभावित होता है। यही वजह है कि घर में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

आंकड़े क्या कहते हैं
फिर भी tertiary enrolment यानी कॉलेज या यूनिवर्सिटी स्तर की शिक्षा में दाखिला दर सिर्फ 34.45% (2025) है। इसका मतलब है कि हर तीन युवाओं में से सिर्फ एक ही उच्च शिक्षा तक पहुंच पा रहा है।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि शिक्षा पूरी करने के बाद भी युवाओं को मौके कम मिल रहे हैं, जिससे Gen Z का भरोसा और घट रहा है।
इन संख्याओं को देखकर समझ आता है कि NEET जैसी परीक्षाएं युवाओं के लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं। जब इनमें गड़बड़ी होती है तो 16.02% (2025) युवा बेरोजगारी पहले से ही मुश्किल हालात को और बदतर बना देती है।
यह क्यों हुआ — background
पिछले कई सालों से NEET परीक्षा पर विवाद होते रहे हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि पेपर पहले से लीक हो गया था। NDA सरकार ने परीक्षा को पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए थे, लेकिन वे पर्याप्त नहीं साबित हुए। एक ठोस उदाहरण पिछले साल का है जब कुछ राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं। तब भी छात्र सड़कों पर उतरे थे। अब वही स्थिति पूरे देश में फैल गई है। Gen Z, जो ज्यादातर छात्र और युवा मतदाता हैं, अब सोशल मीडिया पर अपनी बात जोर-शोर से रख रहे हैं।
इसका मतलब है कि शिक्षा व्यवस्था पर लंबे समय से चली आ रही शिकायतें अब राजनीतिक रूप ले रही हैं। NDA का घरेलू आधार, जो पहले चुप रहता था, अब सवाल पूछ रहा है। हालांकि सरकार कहती है कि जांच चल रही है, लेकिन युवाओं को तुरंत समाधान चाहिए।
मीडिया सूत्रों के अनुसार कई छात्रों ने कहा, “अगर सिस्टम ही गलत है तो पढ़ाई का क्या फायदा।”
भारत पर असर
Gen Z छात्रों की जिंदगी सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। NEET जैसी परीक्षा पास न कर पाने पर उनका मेडिकल का सपना टूट जाता है। इससे परिवारों पर भी बोझ बढ़ता है क्योंकि वे कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। युवा बेरोजगारी 16.02% (2025) होने से पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी न मिलने का डर रहता है। इससे युवाओं की बचत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं। परिवारों में राजनीतिक मतभेद बढ़ रहे हैं, खासकर NDA समर्थक घरों में।
इसका असर सुरक्षा पर भी पड़ रहा है क्योंकि प्रदर्शन बढ़ने से कानून व्यवस्था की चुनौती पैदा हो रही है। आम आदमी के बच्चे अगर उच्च शिक्षा में दाखिला न पा सकें तो उनका पूरा करियर प्रभावित होता है। यही वजह है कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि घर-घर की चिंता बन गया है।
दूसरा पक्ष
सरकार का कहना है कि NEET परीक्षा को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि पिछले सालों की तुलना में इस बार ज्यादा पारदर्शिता लाई गई थी। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने बड़े स्तर की परीक्षा में कुछ गड़बड़ियां हो सकती हैं, लेकिन पूरा सिस्टम खराब नहीं है। NDA का तर्क है कि opposition पार्टियां इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही हैं।
ये सुधार दिखाते हैं कि लंबे समय में स्थिति बेहतर हो रही है। युवाओं को धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
आगे क्या
अगले कुछ हफ्तों में जांच रिपोर्ट आने की उम्मीद है। अगर रिपोर्ट में गड़बड़ी साबित हुई तो NDA को बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। छात्रों के प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले पर सुनवाई कर सकता है। अगर इस्तीफे की मांग बढ़ी तो राजनीतिक दबाव बढ़ेगा। Gen Z युवा अब वोटर के रूप में भी अपनी ताकत दिखा रहे हैं।
सरकार को जल्द कोई ठोस कदम उठाना होगा, वरना घरेलू आधार में dissent और बढ़ सकता है। अगले महीने होने वाले कुछ राज्य चुनावों में भी यह मुद्दा छाया रह सकता है।
मुख्य बातें
- NDA के घरेलू आधार में Gen Z छात्र NEET गड़बड़ी को लेकर पहली बार सड़क पर उतरे हैं और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- भारत में tertiary enrolment सिर्फ 34.45% (2025) है, यानी ज्यादातर युवा उच्च शिक्षा तक नहीं पहुंच पाते।
- युवा बेरोजगारी 16.02% (2025) है, जो पढ़ाई के बाद नौकरी न मिलने का डर बढ़ाती है।
- यह मुद्दा परिवारों में राजनीतिक बहस पैदा कर रहा है क्योंकि कई NDA समर्थक घरों के बच्चे अब सवाल उठा रहे हैं।
निष्कर्ष
NEET में कथित गड़बड़ियों ने Gen Z को NDA के खिलाफ खड़ा कर दिया है। कम tertiary enrolment, ऊंची युवा बेरोजगारी और घटता भरोसा मिलकर युवाओं के भविष्य पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्षता की कमी अब सिर्फ परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक घर की बहस बन गई है। वही रोहन, जिसके परिवार में NDA का समर्थन था, अब अपने माता-पिता से बहस कर रहा है। यही dissent दिखाता है कि युवा अब चुप नहीं रहेंगे।
अगले हफ्ते जब जांच रिपोर्ट आएगी, तब देखना होगा कि सरकार इस गुस्से को कैसे शांत करती है।
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