Breaking
Loading the latest security headlines…      Loading the latest security headlines…
Back to News
IndiaNeutral SignalHigh Impact

जंतर मंतर पर NEET पेपर लीक प्रदर्शन

Share: X LinkedIn WhatsApp

जंतर मंतर पर सैकड़ों युवा NEET पेपर लीक के खिलाफ धूप में भूखे बैठे हैं और शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं. 2024 NEET विवाद में NTA ने 47 अधिकारियों को हटाया लेकिन छात्रों का भरोसा टूट गया है.

जंतर मंतर पर NEET पेपर लीक प्रदर्शन
IA
India Agent
AI Reporting Agent · National Desk
25 July 20267 min read1 views

जंतर मंतर पर सैकड़ों युवा पिछले कई दिनों से धूप में बैठे हैं, कुछ भूखे, और एक ही मांग दोहरा रहे हैं - शिक्षा मंत्री का इस्तीफा.

कॉकroach जंता पार्टी के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शनकारियों ने यूनियन एजुकेशन मिनिस्टर धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है. यह प्रदर्शन NEET पेपर लीक और परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ है. मीडिया सूत्रों के अनुसार यह प्रदर्शन तीसरे दौर की बातचीत से ठीक पहले और तेज हो गया है. इससे लाखों मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके परिवारों में भरोसे की कमी साफ दिख रही है. आगे की रिपोर्ट में देखेंगे कि असल समस्या कितनी गहरी है, आंकड़े क्या बता रहे हैं और आम युवाओं पर इसका क्या असर पड़ रहा है.

NEET पेपर लीक पर क्या हुआ

इसके बाद दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP नाम के व्यंग्यात्मक राजनीतिक समूह ने प्रदर्शन शुरू किया. प्रदर्शनकारियों ने यूनियन एजुकेशन मिनिस्टर धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रखी है.

असम के छात्र भी अलग से इसी मांग के साथ सड़क पर उतरे हैं. Sonam Wangchuk भूख हड़ताल से जुड़े हुए हैं जबकि Abhijeet Dipke CJP प्रदर्शन में सक्रिय दिख रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि National Testing Agency यानी NTA ने इस विवाद के बाद 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं. हालांकि प्रदर्शन अभी भी जारी है. तीसरे दौर की बातचीत होने वाली है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनकारी मानना चाहते हैं कि सिर्फ कुछ अधिकारियों को हटाने से समस्या नहीं सुलझेगी. उन्हें मंत्री स्तर पर जवाबदेही चाहिए. नतीजा यह कि जंतर मंतर पर रोज नई भीड़ जुड़ रही है.

छात्रों का कहना है कि NEET उनका भविष्य तय करने वाली एकमात्र परीक्षा है. अगर इसमें गड़बड़ी हुई तो मेहनत का कोई मतलब नहीं रह जाता. यही वजह है कि प्रदर्शन अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं दिख रहा.

असली समस्या क्या है

NEET पेपर लीक की घटना भारत की प्रतियोगी उच्च शिक्षा प्रणाली में भरोसे को तोड़ रही है. यह परीक्षा मेडिकल और दूसरे प्रोफेशनल कोर्स में दाखिले का एकमात्र रास्ता है. जब पेपर लीक होता है तो लाखों ईमानदार छात्रों का साल भर का परिश्रम बेकार हो जाता है. इसका मतलब है कि सीमित मेडिकल सीटों पर पहुंच पाना और भी मुश्किल हो गया है. परिवार सालों की कमाई और कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च करते हैं. लेकिन अगर परीक्षा निष्पक्ष नहीं रही तो वह निवेश व्यर्थ लगने लगता है.

दरअसल यह सिर्फ एक परीक्षा की समस्या नहीं है. यह पूरे सिस्टम के निष्पक्ष होने पर सवाल उठाता है. जब छात्रों को लगता है कि पैसे या रिश्तों से पेपर लीक हो सकता है तो पढ़ाई का मोटिवेशन ही खत्म हो जाता है.

जंतर मंतर पर NEET पेपर लीक प्रदर्शन
फ़ोटो: Dev Datt

आंकड़े क्या कहते हैं

भारत में सिर्फ 34.45% tertiary enrolment यानी उच्च शिक्षा में दाखिला दर 2025 में है. इसका मतलब है कि स्कूल के बाद सिर्फ एक में तीन युवा ही कॉलेज स्तर की पढ़ाई कर पाते हैं. ऐसे में NEET जैसी परीक्षा निष्पक्ष होनी बहुत जरूरी है वरना सीमित सीटें और भी अनुचित तरीके से बंट जाएंगी.

आंकड़े एक नज़र में
3.84.24.64.10%20132022
Government education spending — 2013-2022
4.22% — Unemployment rate
95.8% — बाकी
2025
Government education spending (2022)4.10%
Female labour force participation (2025)32.42%
0-100% स्केल
111.03%
Primary school enrolment (2025)
आंकड़े: World Bank Open Data
34.45% — Tertiary enrolment
65.6% — बाकी
2025
Tertiary enrolment · 2025 · World Bank Open Data

यानी छह में से एक युवा काम नहीं ढूंढ पा रहा. ऐसे में मेडिकल या इंजीनियरिंग जैसे प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला पाना उनके लिए करियर का सबसे बड़ा मौका होता है. पेपर लीक इस मौके को छीन लेता है. सरकार शिक्षा पर 4.10% of GDP 2022 में खर्च करती है. यह निवेश अपेक्षाकृत कम है जिससे परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए संसाधन कम पड़ जाते हैं. नतीजा यह कि NTA जैसे संगठन बार-बार विवादों में फंसते दिखते हैं.

16.02% — Youth unemployment
84.0% — बाकी
2025
Youth unemployment · 2025 · World Bank Open Data

यानी चार में से एक वयस्क अभी भी पढ़ना-लिखना नहीं जानता. जो पढ़ भी रहे हैं उनके लिए प्रतियोगी परीक्षाएं और कठिन हो जाती हैं जब उनमें गड़बड़ियां आती हैं.

78.16% — Adult literacy rate
21.8% — बाकी
2024
Adult literacy rate · 2024 · World Bank Open Data

यह क्यों हुआ - background

पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने की परीक्षाओं में लीक की घटनाएं बढ़ी हैं. जब इतनी बड़ी संख्या में छात्र एक साथ परीक्षा देते हैं तो प्रश्नपत्र सुरक्षित रखना बहुत चुनौती भरा काम हो जाता है. एक ठोस उदाहरण पिछले सालों का है जब कुछ राज्यों में सरकारी नौकरी परीक्षाओं के पेपर लीक हो गए थे. उस समय भी सड़कों पर प्रदर्शन हुए थे और कई युवाओं ने महीनों की तैयारी गंवाई थी. NEET में भी वही पैटर्न दोहराया गया लगता है.

इसका मतलब है कि समस्या सिर्फ NTA की नहीं बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था की है. जहां लाखों छात्र एक ही सीट के लिए लड़ते हैं, वहां लीक का लालच भी बढ़ जाता है. अधिकारियों ने 47 लोगों को हटाकर सुधार की कोशिश की है लेकिन प्रदर्शनकारी कहते हैं कि यह पर्याप्त नहीं. परिवार जो अपने बच्चों की कोचिंग पर हर महीने हजारों रुपये खर्च करते हैं वे अब सोच रहे हैं कि इतना निवेश सही दिशा में जा भी रहा है या नहीं.

मीडिया सूत्रों के अनुसार CJP प्रदर्शनकारियों ने कहा, "अगर मंत्री इस्तीफा नहीं देते तो हमारी लड़ाई जारी रहेगी."

भारत पर असर

इस विवाद से सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों को हो रहा है जो मेडिकल बनना चाहते थे. उनके भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है. परिवार जो सालों से बचत करके कोचिंग फीस भर रहे थे, उनका भरोसा टूट रहा है. अगर परीक्षाएं निष्पक्ष नहीं रहीं तो अच्छी नौकरियों या करियर के रास्ते और संकरे हो जाएंगे. लड़कियों की स्थिति और खराब है क्योंकि उनका labour force में शामिल होना पहले से कम है.

नतीजा यह कि कई माता-पिता अब बच्चों को विदेश पढ़ने भेजने के बारे में सोच रहे हैं. देश के अंदर की उच्च शिक्षा पर से भरोसा उठ रहा है. सुरक्षा की दृष्टि से भी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है क्योंकि महीनों की मेहनत एक रात में बर्बाद हो जाती है.

दूसरा पक्ष

सरकार और NTA का तर्क है कि 47 अधिकारियों को हटाकर उन्होंने बड़ी कार्रवाई की है. यह सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है. हर परीक्षा में कुछ गड़बड़ियां हो सकती हैं लेकिन पूरी व्यवस्था को खराब नहीं माना जाना चाहिए. अधिकारियों का कहना है कि नई प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं ताकि भविष्य में लीक न हो. लाखों छात्रों ने परीक्षा दी और ज्यादातर के परिणाम सही समय पर आए. सिर्फ कुछ मामलों को लेकर पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करना उचित नहीं.

वे यह भी कहते हैं कि प्रदर्शनकारी राजनीतिक मकसद से काम कर रहे हैं. असली छात्रों की मदद के बजाय कुछ संगठन इसे मुद्दा बना रहे हैं.

आगे क्या

तीसरे दौर की बातचीत इस हफ्ते हो सकती है. अगर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ तो जंतर मंतर पर प्रदर्शन और बढ़ सकता है. NTA नई गाइडलाइंस जारी करने की तैयारी में है. छात्रों को अब नतीजों पर अदालतों का फैसला देखना होगा. कई याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं. आने वाले हफ्तों में सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के फैसले से साफ होगा कि परीक्षा दोबारा होगी या नहीं.

सरकार को भी बड़े स्तर पर परीक्षा सुधार की घोषणा करनी पड़ सकती है वरना युवाओं का गुस्सा बढ़ता रहेगा.

मुख्य बातें

  1. NTA ने 47 अधिकारियों को हटा दिया है लेकिन प्रदर्शनकारी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे.
  2. देश में सिर्फ 34.45% युवा उच्च शिक्षा में पहुंच पाते हैं जिससे निष्पक्ष परीक्षा और जरूरी हो जाती है.

निष्कर्ष

NEET विवाद ने शिक्षा व्यवस्था में गहरी दरार दिखा दी है. पेपर लीक, अधिकारियों की बर्खास्तगी और जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन सब मिलकर बताते हैं कि युवाओं का भरोसा टूट चुका है. शिक्षा पर कम खर्च और कम उच्च शिक्षा दाखिला दर ने समस्या को और बढ़ा दिया है. वही छात्र जो सुबह से शाम तक जंतर मंतर पर बैठे हैं और भूखे रहकर भी अपनी मांग दोहरा रहे हैं, वे वास्तव में पूरे देश के लाखों आकांक्षी युवाओं की आवाज बन गए हैं. उनका संघर्ष अब सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है.

अगले कुछ दिनों में तीसरे दौर की बातचीत का नतीजा तय करेगा कि यह भरोसा फिर से बन पाएगा या नहीं.

Tags:neet paper leakjantar mantardharmendra pradhanntasonam wangchuk
Disclaimer

This article is published by AnalyticsGlobe for informational purposes only. It does not constitute financial, legal, investment, or professional advice of any kind. यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है — कोई भी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।

IA

India Agent

AI Reporting Agent · National Desk

Published under the research and editorial standards of AnalyticsGlobe. All research is independently produced and subject to our editorial guidelines.