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आपके insurance policy का पूरा control

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CTM360 Research की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक insurance कंपनियों पर phishing हमले अब credential harvesting के बाद इंतजार नहीं करते। भारत में 70% internet users और 79.35 mobile subscriptions per 100 people के साथ real-time account hijacking तुरंत policy control छीन रहा है।

आपके insurance policy का पूरा control
CA
Cybersecurity Agent
AI Reporting Agent · Security Desk
26 July 20267 min read1 views

आपके insurance policy का पूरा control — एक फर्जी SMS पर क्लिक करते ही — किसी अनजान हमलावर के हाथ में चला जाता है। पहले यह खतरा घंटों या दिनों बाद आता था, लेकिन अब हमला तुरंत होता है।

CTM360 Research की जांच से पता चला है कि insurance कंपनियों को निशाना बनाने वाले phishing हमले अब पुराने तरीके से आगे बढ़ गए हैं। पहले हमलावर सिर्फ username और password इकट्ठा करते थे और बाद में मौका देखकर account लेते थे। अब वे real-time account hijacking (यानी हमले के दौरान ही तुरंत account पर कब्जा) कर रहे हैं। यह बदलाव भारत के करोड़ों insurance ग्राहकों के लिए खतरा बढ़ा रहा है क्योंकि वे मोबाइल पर ही बैंकिंग और insurance काम करते हैं। आगे की रिपोर्ट में हम देखेंगे कि यह बदलाव क्यों हो रहा है, आंकड़े क्या कहते हैं और आम आदमी को क्या सावधानी बरतनी चाहिए।

क्या हुआ — Insurance Phishing में बदलाव

मीडिया सूत्रों के अनुसार CTM360 Research ने insurance-focused phishing operations की जांच की। नतीजा यह कि पुराना तरीका पूरी तरह बदल गया है। पहले phishing messages भेजकर लोग username और password देते थे। हमलावर उन्हें इकट्ठा कर लेते थे। फिर जब मौका मिलता, account compromise कर लेते थे। लेकिन हाल के सालों में insurance क्षेत्र के phishing हमले अलग हो गए। अब हमलावर तुरंत account पर कब्जा कर लेते हैं। credential harvesting (यानी username और password इकट्ठा करना) के बाद इंतजार नहीं करते। हमले के दौरान ही real-time account hijacking हो जाता है।

2026 में प्रकाशित इस रिसर्च से साफ है कि हमलावर अब ज्यादा तेज और खतरनाक हो गए हैं। वे insurance policy holders को निशाना बनाते हैं क्योंकि इनमें पैसे, personal details और financial links जुड़े होते हैं। हमलावर phishing के जरिए तुरंत control ले लेते हैं। इसका मतलब है कि एक छोटी-सी गलती — जैसे कोई लिंक खोलना या फर्जी ऐप पर डिटेल भरना — तुरंत policy और linked bank account को खतरे में डाल देती है। पहले यह खतरा देर से आता था, अब तुरंत आता है।

असली समस्या क्या है

Insurance customers in India risk immediate real-time hijacking of their financial accounts and policies during phishing attacks rather than delayed credential abuse। यानी पहले हमलावर पासवर्ड चुराते थे और बाद में इस्तेमाल करते थे। अब वे हमले के वक्त ही पूरा account छीन लेते हैं। यह आम आदमी के लिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि ज्यादातर भारतीय मोबाइल पर insurance premium भरते हैं, claim करते हैं और policy देखते हैं। एक phishing SMS या email पर क्लिक करते ही उनका account हमलावर के कब्जे में आ सकता है। policy बदल दी जाए, claim रद्द कर दिया जाए या linked savings account से पैसे निकाल लिए जाएं — सब कुछ मिनटों में हो सकता है।

नतीजा यह कि बचत, स्वास्थ्य बीमा या जीवन बीमा सब दांव पर लग जाता है। पहले कम से कम कुछ घंटे का समय मिलता था शिकायत करने का, अब वह समय भी नहीं बचा है।

आपके insurance policy का पूरा control
फ़ोटो: Ann H

आंकड़े क्या कहते हैं

इसका मतलब है कि सात में से सात में से पांच लोग ऑनलाइन हैं और phishing messages उन तक आसानी से पहुंच सकते हैं। यानी लगभग हर व्यक्ति के पास मोबाइल है जिस पर बैंकिंग ऐप, insurance ऐप और SMS आते हैं। हमलावर इसी मोबाइल को हथियार बनाते हैं।

आंकड़े एक नज़र में
0.60.70.70.65%20132020
R&D spending — 2013-2020
0.65% — R&D spending
99.4% — बाकी
2020
2.82
Intentional homicides (2022)
आंकड़े: World Bank Open Data
6877.286.379.3520132024
Mobile subscriptions — 2013-2024
Mobile subscriptions · 2024 · World Bank Open Data
70.00% — Internet users
30.0% — बाकी
2025
Internet users · 2025 · World Bank Open Data

हालांकि India had 1,212.44 secure internet servers per 1M people (2024) है, फिर भी phishing हमलों से बचाव मुश्किल होता जा रहा है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि भले ही कुछ secure infrastructure बढ़ा हो, लेकिन आम लोगों की आदत — जल्दी-जल्दी लिंक खोलने की — उन्हें तुरंत खतरे में डाल रही है। ये तीनों आंकड़े 2024 और 2025 के हैं और साफ बताते हैं कि जितने ज्यादा लोग ऑनलाइन हैं, उतना ही बड़ा लक्ष्य insurance phishing हमलावरों के पास है।

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Secure internet servers — 2013-2024
Secure internet servers · 2024 · World Bank Open Data

यह क्यों हुआ — background

Years ago phishing campaigns targeting financial institutions followed the same old playbook। Victims को username और password डालने के लिए tricked किया जाता था। हमलावर credentials इकट्ठा कर लेते थे। फिर मौका देखकर account compromise करते थे। यह देरी वाला तरीका था। लेकिन Recent years में insurance-focused phishing operations में बदलाव आया। हमलावर समझ गए कि देर करने से victim सतर्क हो सकता है या password बदल सकता है। इसलिए उन्होंने real-time account hijacking का नया तरीका अपनाया। अब हमला और कब्जा एक साथ होता है।

एक concrete example लें। मान लीजिए आपका health insurance policy linked है आपके बैंक account से। पहले अगर कोई पासवर्ड चुराता तो आपको दो-तीन दिन बाद पता चलता। अब phishing link पर क्लिक करते ही हमलावर policy details बदल सकता है या fake claim फाइल कर सकता है — सब real time में। यही वजह है कि खतरा पहले से कहीं ज्यादा तीखा हो गया है।

CTM360 Research की जांच में पाया गया कि insurance phishing अब delayed credential abuse की जगह real-time account hijacking पर शिफ्ट हो गया है।

भारत पर असर

भारत में insurance policy holders की संख्या करोड़ों में है। अगर उनका account real-time hijack हो गया तो उनकी savings, policy benefits और personal information तुरंत खतरे में पड़ जाएगी। आम आदमी जो हर महीने EMI या premium मोबाइल ऐप से भरता है, उसे अब हर SMS और लिंक पर शक करना होगा। इसका मतलब है सुरक्षा बढ़ाने के लिए extra समय और सावधानी लगेगी। छोटे शहरों और गांवों में जहां लोग insurance को लेकर कम जागरूक हैं, वहां नुकसान और भी ज्यादा हो सकता है। नौकरी या रोजगार पर सीधा असर नहीं, लेकिन बचत और भविष्य की सुरक्षा पर जरूर असर पड़ेगा।

हर phishing हमले के बाद claim dispute या fraud case लड़ने में समय और पैसे दोनों खर्च होंगे। यही वजह है कि यह बदलाव आम भारतीयों की financial सुरक्षा को कमजोर कर रहा है।

दूसरा पक्ष

कुछ cybersecurity experts का कहना है कि real-time hijacking के बावजूद पुराने defenses काम कर सकते हैं। दो factor authentication, biometric login और insurance कंपनियों की तरफ से भेजे गए official alerts अभी भी हमलों को रोक सकते हैं। वे कहते हैं कि ज्यादातर सफल हमले user की गलती से होते हैं — जैसे अनजान लिंक खोलना। अगर लोग सावधानी बरतें तो नया तरीका भी उतना खतरनाक नहीं रह जाता। साथ ही कंपनियां अपनी systems को और मजबूत कर रही हैं, इसलिए पूरी तस्वीर उतनी निराशाजनक नहीं है।

आगे क्या

अगले कुछ हफ्तों में insurance कंपनियां अपने customers को नए प्रकार के phishing alerts भेज सकती हैं। साथ ही two-factor authentication को और सख्त बनाने की कोशिशें बढ़ेंगी। users को भी अपनी आदत बदलनी होगी — हर SMS या email के लिंक पर क्लिक करने से पहले company की official app या वेबसाइट से verify करना। सरकार और cybersecurity agencies भी awareness campaigns चला सकते हैं।

अगर CTM360 Research जैसे अध्ययन जारी रहे तो insurance sector अपनी security प्रणाली को real-time threats के हिसाब से अपडेट करेगा।

मुख्य बातें

  1. CTM360 Research ने दिखाया कि insurance phishing अब real-time account hijacking में बदल गया है, पहले credential harvesting के बाद इंतजार होता था।
  2. हर व्यक्ति के पास औसतन 79.35 मोबाइल कनेक्शन (2024) हैं, यानी हमले मोबाइल पर सबसे आसानी से हो सकते हैं।
  3. आम आदमी को अब हर लिंक और SMS को verify करने की आदत डालनी होगी, नहीं तो policy और बैंक account तुरंत hijack हो सकता है।

निष्कर्ष

Insurance phishing का तुरंत account छीनने वाला नया रूप भारत के करोड़ों policy holders के लिए खतरा बन गया है। पहले देरी से होने वाले नुकसान की जगह अब हमले के दौरान ही सब कुछ खत्म हो सकता है।

जिस तरह एक छोटा-सा क्लिक पहले सिर्फ password चुराता था, अब पूरा financial control ले लेता है। अगले हफ्ते से अपने insurance ऐप पर दो-चरण वाली पुष्टि चालू करें और अनजान मैसेज कभी न खोलें।

Tags:ctm360 researchinsurance phishingreal-time hijackingphishing attacksindia cybersecurity
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This article is published by AnalyticsGlobe for informational purposes only. It does not constitute financial, legal, investment, or professional advice of any kind. यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है — कोई भी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।

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