वी कामकोटी ने बताया JEE पेपर लीक क्यों नहीं होता
2024 मेडिकल एंट्रेंस पेपर लीक के बाद PM मोदी की टास्क फोर्स में शामिल IIT प्रोफेसर वी कामकोटी ने बताया कि JEE में ऑप्टिकल सेंसर्स की वजह से पेपर लीक नहीं होता। Tertiary enrolment 34.45% और youth unemployment 16.02% होने से लीक की समस्या युवाओं के भविष्य को और प्रभावित करती है।

उसी वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह सदस्यों की एक टास्क फोर्स बनाई जिसमें शामिल आईआईटी प्रोफेसर वी कामकोटी ने अब बताया कि जेईई में पेपर लीक क्यों नहीं होता।
आईआईटी प्रोफेसर वी कामकोटी ने बताया कि जेईई एग्जाम में पेन-पेपर की जगह ऑप्टिकल सेंसर्स (यानी रोशनी के पैटर्न को पहचानकर पेपर या आंसर शीट में छेड़छाड़ रोकने वाले उपकरण) लगाए गए हैं। यह बात इसलिए मायने रखती है क्योंकि मेडिकल एग्जाम के लीक के बाद लाखों स्टूडेंट्स का भरोसा टूट गया है। मीडिया सूत्रों के अनुसार टास्क फोर्स अब पूरे सिस्टम को मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है। आगे यह रिपोर्ट बताएगी कि सुरक्षा के ये नए तरीके आम स्टूडेंट्स के भविष्य को कैसे बचाते हैं।
जेईई में लीक क्यों नहीं होता
वी कामकोटी आईआईटी के प्रोफेसर हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह सदस्यों वाली एग्जाम रिफॉर्म टास्क फोर्स बनाई। वी कामकोटी उसी टास्क फोर्स का हिस्सा हैं। मीडिया सूत्रों के अनुसार उन्होंने बताया कि जेईई यानी जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन में पेपर लीक नहीं हुआ है। पुराने समय में यह एग्जाम पेन और पेपर से होता था। अब इसमें ऑप्टिकल सेंसर्स का इस्तेमाल किया जाता है। ये सेंसर्स लाइट के पैटर्न को पढ़कर किसी भी तरह की tampering यानी छेड़छाड़ पकड़ लेते हैं।
इसका मतलब है कि पेपर प्रिंटिंग से लेकर ट्रांसपोर्ट और एग्जाम हॉल तक हर स्टेप पर सुरक्षा बढ़ गई है। अधिकारियों ने बताया कि यही वजह है कि पिछले कई सालों में जेईई में कोई बड़ा लीक नहीं देखा गया। लेकिन मेडिकल एग्जाम में हुई घटना ने पूरे देश को हिला दिया। टास्क फोर्स अब इसी सुरक्षा मॉडल को दूसरे एग्जाम्स में भी लागू करने की सोच रही है। वी कामकोटी का कहना है कि तकनीक ने जेईई को सुरक्षित रखा है। नतीजा यह कि इंजीनियरिंग की सीटों के लिए तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को अब थोड़ी राहत महसूस हो रही है।
असली समस्या क्या है
हालांकि मेडिकल एग्जाम का पेपर लीक होना सिर्फ एक घटना नहीं था। यह बड़ी समस्या की तरफ इशारा करता है। हाई स्टेक्स वाले राष्ट्रीय एंट्रेंस एग्जाम में बार-बार लीक होना लाखों स्टूडेंट्स का भरोसा तोड़ देता है। वे सालों तक रात-दिन पढ़ते हैं लेकिन लीक के कारण कुछ लोग unfair तरीके से आगे निकल जाते हैं।
इससे टॉप इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की सीमित सीटें सही merit वाले स्टूडेंट्स को नहीं मिल पातीं। मीडिया सूत्रों के अनुसार यह समस्या युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है। परिवार सालों की मेहनत और पैसे लगाते हैं लेकिन एक लीक सब बर्बाद कर देता है। नतीजा यह कि स्टूडेंट्स में हताशा बढ़ती है। जो बच्चे ईमानदारी से तैयारी करते हैं उन्हें लगता है कि पूरा सिस्टम उनके खिलाफ है। यही वजह है कि विरोध प्रदर्शन होते हैं और सरकार को नई टास्क फोर्स बनानी पड़ती है।

आंकड़े क्या कहते हैं
भारत में टर्शियरी एनरोलमेंट यानी उच्च शिक्षा में दाखिला दर 34.45% (2025) है। इसका मतलब है कि स्कूल के बाद सिर्फ एक में तीन युवा ही कॉलेज जा पाते हैं। ऐसे में जेईई जैसा एग्जाम पास करके टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में जगह मिलना और भी जरूरी हो जाता है। अगर लीक होता है तो यह मौका छिन जाता है।
इसका मतलब है कि छह में से एक युवा को नौकरी नहीं मिल रही। इसलिए जेईई जैसा एग्जाम सफल होना स्थिर नौकरी का एक बड़ा रास्ता है। लीक से यह रास्ता अविश्वास से भर जाता है। इसका मतलब है कि स्कूल-कॉलेज की गुणवत्ता सुधारने के लिए देश अपनी अर्थव्यवस्था का एक छोटा हिस्सा ही लगाता है। नतीजा यह कि आम स्टूडेंट्स को अच्छी तैयारी के लिए कोचिंग पर अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि शिक्षा का दायरा सीमित है और प्रतियोगिता बहुत ज्यादा है। लीक होने से यह प्रतियोगिता और भी अनुचित हो जाती है।
यह क्यों हुआ — background
इसका मतलब है कि पुराने पेन-पेपर सिस्टम में पेपर को चोरी करना या बाहर लीक करना आसान था। कई बार प्रिंटिंग प्रेस से ही पेपर बाहर आ जाते थे। लेकिन जेईई में अब ऑप्टिकल सेंसर्स (यानी रोशनी के पैटर्न को पहचानकर छेड़छाड़ रोकने वाले उपकरण) लगाए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टास्क फोर्स में वी कामकोटी जैसे विशेषज्ञ शामिल किए गए। उन्होंने जेईई के मॉडल को उदाहरण बताया।
एक रोजमर्रा की तुलना समझ लीजिए। जैसे बैंक में नोट गिनने वाली मशीन नकली नोट पकड़ लेती है वैसे ही ये सेंसर्स पेपर में किसी बदलाव को तुरंत बता देते हैं। यही वजह है कि जेईई अब तक सुरक्षित रहा। लेकिन दूसरे एग्जाम में ऐसी सुरक्षा नहीं होने से समस्या बनी रही। टास्क फोर्स का काम अब पूरे देश के एंट्रेंस एग्जाम को इसी तरह मजबूत बनाना है।
वी कामकोटी ने कहा कि पेन-पेपर से ऑप्टिकल सेंसर्स तक जाने की वजह से जेईई में लीक नहीं हुआ।
भारत पर असर
इस समस्या का सीधा असर करोड़ों स्टूडेंट्स और उनके परिवारों पर पड़ता है। जो बच्चे सालों तक जेईई की तैयारी करते हैं उनके मन में डर बैठ जाता है कि कहीं पेपर लीक न हो जाए। इससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है और तनाव बढ़ता है। परिवार लाखों रुपये कोचिंग और किताबों पर खर्च करते हैं। अगर लीक के कारण सीट नहीं मिली तो सारा निवेश व्यर्थ हो जाता है। युवा बेरोजगारी के इस माहौल में जेईई पास करना अच्छी नौकरी का टिकट माना जाता है। लीक से यह टिकट नकली हो जाता है।
लड़कियों पर असर और ज्यादा है क्योंकि देश में महिला labour force participation सिर्फ 32.42% (2025) है। अच्छी शिक्षा और नौकरी के बिना उनके आगे बढ़ने के रास्ते और भी कम हो जाते हैं। इसलिए एग्जाम की निष्पक्षता हर परिवार की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ी है।
दूसरा पक्ष
हालांकि कई विशेषज्ञ कहते हैं कि पूरी तरह लीक रोकना मुश्किल है। बड़े स्तर पर होने वाले एग्जाम में लाखों स्टूडेंट्स शामिल होते हैं। ऐसे में मानवीय गलती या अंदरूनी सांठगांठ हमेशा संभव रहती है। टास्क फोर्स के कुछ सदस्य मानते हैं कि सिर्फ तकनीक काफी नहीं। स्टूडेंट्स और अभिभावकों को भी जागरूक करना जरूरी है। वे कहते हैं कि सख्त कानून और तेज जांच के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को भी सुधारना होगा ताकि इतनी भारी प्रतियोगिता कम हो।
इसका मतलब है कि जेईई का मॉडल अच्छा है लेकिन हर एग्जाम में उसे लागू करना आसान नहीं। फिर भी सरकार इसे सबसे मजबूत विकल्प मान रही है।
आगे क्या
अब टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने वाली है। मीडिया सूत्रों के अनुसार अगले कुछ हफ्तों में नए नियम आ सकते हैं। इनमें ऑप्टिकल सेंसर्स जैसे उपकरणों को दूसरे एग्जाम में भी अनिवार्य करने की बात हो रही है। स्टूडेंट्स को देखना होगा कि नया कानून कितना असरदार साबित होता है।
अगले एग्जाम सीजन से पहले अगर ये बदलाव लागू हो गए तो लाखों युवाओं को फायदा होगा। लेकिन असली परीक्षा तो तब होगी जब देखा जाएगा कि नई व्यवस्था कितनी पारदर्शी रहती है।
मुख्य बातें
- वी कामकोटी ने बताया कि जेईई में पेन-पेपर की जगह ऑप्टिकल सेंसर्स लगाए गए जिससे लीक नहीं हो पाया।
- भारत में टर्शियरी एनरोलमेंट सिर्फ 34.45% (2025) है और यूथ बेरोजगारी 16.02% (2025) है जिससे एग्जाम की निष्पक्षता और महत्वपूर्ण हो जाती है।
निष्कर्ष
मेडिकल एग्जाम के लीक ने पूरे एंट्रेंस सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए लेकिन जेईई का उदाहरण दिखाता है कि सही तकनीक से लीक रोका जा सकता है। ऑप्टिकल सेंसर्स ने इंजीनियरिंग एग्जाम को सुरक्षित रखा है जबकि शिक्षा खर्च कम होने और युवा बेरोजगारी ज्यादा होने से आम स्टूडेंट्स का दबाव बढ़ा हुआ है।
अब पूरा सिस्टम बदलने की कोशिश चल रही है। अगले एग्जाम सीजन से पहले सरकार के नए नियमों पर नजर रखें क्योंकि यही तय करेगा कि आपके बच्चे की मेहनत का फल मिलेगा या नहीं।
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