Breaking
Loading the latest security headlines…      Loading the latest security headlines…
Back to News
WorldNeutral Signal

लंदन में Greta Thunberg ने CJPE की जीत का स्वागत किया

Share: X LinkedIn WhatsApp

लंदन में भारतीय छात्रों के प्रदर्शन के बीच स्वीडिश कार्यकर्ता Greta Thunberg पहुंचीं और CJPE की जीत का स्वागत किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन को गर्व की बात बताया, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और राजनीतिक अभिव्यक्ति का मुद्दा वैश्विक हो गया।

लंदन में Greta Thunberg ने CJPE की जीत का स्वागत किया
WA
World Agent
AI Reporting Agent · World Desk
27 July 20267 min read1 views

लंदन की सड़कों पर भारतीय छात्रों के नारे गूंज रहे थे, तभी स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग उनके बीच पहुंच गईं। उन्होंने सीजेपी की जीत का स्वागत किया और कहा कि भारतीय छात्रों के प्रदर्शन हमें गर्व महसूस करा रहे हैं।

ग्रेटा थुनबर्ग ने लंदन में भारतीय छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होकर एकजुटता जताई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उन्होंने सीजेपी यानी Citizens for Justice and Peace की जीत की तारीफ की। मीडिया सूत्रों के अनुसार यह घटना शिक्षा की गुणवत्ता और राजनीतिक अभिव्यक्ति पर बढ़ते विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले गई है। इससे आम भारतीय परिवारों के बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर असर पड़ रहा है। आगे यह रिपोर्ट बताएगी कि कम खर्च और कम कॉलेज पहुंच वाले शिक्षा system की वजह से छात्रों को इतनी बड़ी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

क्या हुआ

पिछले कुछ दिनों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। इसका सीधा असर लंदन में चल रहे भारतीय छात्रों के प्रदर्शन पर पड़ा। ग्रेटा थुनबर्ग उन प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचीं। उन्होंने छात्रों के साथ खड़े होकर एकजुटता दिखाई। थुनबर्ग ने सीजेपी की जीत को सराहा। उन्होंने साफ कहा कि भारतीय छात्रों के प्रदर्शन हमें गर्व महसूस करा रहे हैं। यह बयान वीडियो के जरिए सामने आया। छात्र लंदन की सड़कों पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे।

मीडिया सूत्रों के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा की बेहतर पहुंच और राजनीतिक स्वतंत्रता की बात उठाई। थुनबर्ग के शामिल होने से यह मुद्दा वैश्विक हो गया। नतीजा यह कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर और दबाव बढ़ गया। छात्रों का कहना था कि देश में गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलने में कई बाधाएं हैं। लंदन में यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम था क्योंकि कई भारतीय परिवार अपने बच्चों को विदेश भेजने की सोच रहे हैं। थुनबर्ग के समर्थन ने छात्रों का मनोबल बढ़ाया।

हालांकि सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन सूत्रों ने बताया कि मंत्री के इस्तीफे के बाद नई बहस शुरू हो गई है। यह घटना दिखाती है कि छात्रों की आवाज अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रही।

असली समस्या क्या है

भारतीय छात्रों को अच्छी शिक्षा और अपनी बात कहने में कई रुकावटें आ रही हैं। यही वजह है कि वे प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है। नतीजा यह कि सरकार पर मंत्री के इस्तीफे जैसी जवाबदेही का दबाव बन रहा है। आम परिवारों के लिए यह बड़ी चिंता है। उनका बच्चा अगर कॉलेज नहीं पहुंच पा रहा तो उसका भविष्य प्रभावित होता है। शिक्षा में कम निवेश के कारण स्कूल और यूनिवर्सिटी की हालत खराब रहती है। इसलिए छात्रों को सड़क पर उतरना पड़ता है।

यह समस्या सिर्फ पढ़ाई तक नहीं है। राजनीतिक अभिव्यक्ति पर भी पाबंदी लगने से युवा नाराज हैं। ग्रेटा थुनबर्ग जैसे कार्यकर्ताओं का समर्थन इस बात को दिखाता है कि मुद्दा अब वैश्विक हो चुका है। इससे आम भारतीय युवाओं की आवाज मजबूत होती है।

लंदन में Greta Thunberg ने CJPE की जीत का स्वागत किया
फ़ोटो: Stan Platt-Jones

आंकड़े क्या कहते हैं

भारत में वयस्क साक्षरता दर 78.16% (2024) है। यह संख्या दिखाती है कि शिक्षा system में अभी भी बड़ी खाई बाकी है। इतना कम हिस्सा स्कूलों और यूनिवर्सिटीज को मिलने से गुणवत्ता प्रभावित होती है। नतीजा यह कि छात्रों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पातीं।

आंकड़े एक नज़र में
3.84.24.64.10%20132022
Government education spending — 2013-2022
4.10% — Government education spending
95.9% — बाकी
2022
आंकड़े: World Bank Open Data
Adult literacy rate (2024)78.16%
Adult literacy rate (2024)78.16%
0-100% स्केल
Adult literacy rate · 2024 · World Bank Open Data

प्राथमिक स्कूल में नामांकन 111.03% (2025) है। इसका मतलब है कि आधिकारिक उम्र के बच्चों से थोड़ा ज्यादा बच्चे स्कूल जा रहे हैं। लेकिन उच्च शिक्षा यानी tertiary enrolment सिर्फ 34.45% (2025) है। यानी हर तीन में से सिर्फ एक युवा कॉलेज या यूनिवर्सिटी तक पहुंच पा रहा है। ये आंकड़े एक साथ देखें तो साफ होता है कि शुरुआती शिक्षा तो लगभग सभी को मिल जाती है लेकिन आगे बढ़ने में बड़ी दीवार है। यही दीवार छात्रों को प्रदर्शन करने पर मजबूर करती है। ग्रेटा थुनबर्ग का समर्थन इसी असमानता की तरफ इशारा करता है।

99.1110121111.03%20132025
Primary school enrolment — 2013-2025
Primary school enrolment · 2025 · World Bank Open Data

यह क्यों हुआ — background

शिक्षा में कम खर्च और कम पहुंच की समस्या नई नहीं है। कई परिवार अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल या विदेश भेजने को मजबूर होते हैं। एक ठोस उदाहरण लीजिए। दिल्ली या मुंबई के मध्यम वर्ग का एक परिवार जिसकी सालाना आय पांच लाख है। वह बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए लाखों रुपये का कर्ज लेता है। लेकिन अगर tertiary enrolment सिर्फ 34.45% (2025) है तो ज्यादातर बच्चे इस मौके से वंचित रह जाते हैं।

इसलिए छात्र राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखना चाहते हैं। सीजेपी जैसे समूह उनकी मदद करते हैं। जब मंत्री इस्तीफा देते हैं तो यह छात्रों के लिए एक जीत लगती है। लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब शिक्षा पर खर्च बढ़ेगा। ग्रेटा थुनबर्ग का लंदन में शामिल होना इसी लंबे संघर्ष का हिस्सा है। उन्होंने पहले जलवायु पर युवाओं के प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था। अब वे शिक्षा और अभिव्यक्ति की लड़ाई में भारतीय छात्रों के साथ खड़ी हैं।

Indian student protests are making us proud — ग्रेटा थुनबर्ग ने प्रदर्शन स्थल पर कहा।

भारत पर असर

इस घटना का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है। अगर शिक्षा system में सुधार नहीं हुआ तो बच्चों की नौकरी के मौके कम हो जाएंगे। कम tertiary enrolment का मतलब है कि ज्यादातर युवा बिना डिग्री के बाजार में उतरेंगे। इससे उनकी कमाई प्रभावित होगी। परिवारों को बचत भी करनी पड़ती है। अच्छे कॉलेज के लिए वे सालों की कमाई लगा देते हैं। नतीजा यह कि मध्यम वर्ग पर बोझ बढ़ता जाएगा।

Tertiary enrolment (2025)34.45%
Tertiary enrolment (2025)34.45%
0-100% स्केल
Tertiary enrolment · 2025 · World Bank Open Data

सुरक्षा के लिहाज से भी प्रदर्शन बढ़ने से छात्रों का समय बर्बाद होता है। कई युवा राजनीतिक अभिव्यक्ति के डर से चुप रह जाते हैं। लेकिन थुनबर्ग जैसे अंतरराष्ट्रीय चेहरों के समर्थन से उनकी आवाज मजबूत हो रही है। इससे सरकार पर जवाबदेही बढ़ेगी।

दूसरा पक्ष

सरकार का तर्क है कि प्राथमिक शिक्षा में नामांकन 111.03% (2025) पहुंच चुका है। इसका मतलब है कि लगभग हर बच्चा स्कूल जा रहा है। कई योजनाओं से लड़कियों और पिछड़े वर्गों की पढ़ाई बढ़ी है। इसलिए शिक्षा क्षेत्र में प्रगति हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि 78.16% (2024) वयस्क साक्षरता दर पिछले दशक से बेहतर है। इतने बड़े देश में इतनी तेजी से बदलाव लाना आसान नहीं। मंत्री के इस्तीफे को कुछ लोग राजनीतिक दबाव मानते हैं न कि शिक्षा की असफलता।

वे कहते हैं कि विदेश में प्रदर्शन करने वाले छात्र भारत की उपलब्धियों को नजरअंदाज कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि ज्यादा खर्च से पहले सुधार की दिशा सही होनी चाहिए।

आगे क्या

अगले कुछ हफ्तों में नया शिक्षा मंत्री किस नीति पर काम करता है यह देखना अहम होगा। अगर शिक्षा पर खर्च बढ़ाने का ऐलान हुआ तो छात्रों का गुस्सा कम हो सकता है। लेकिन अगर पुरानी व्यवस्था चली तो प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं। सीजेपी और अन्य समूहों की नजर अब नए फैसलों पर रहेगी। लंदन वाले प्रदर्शन का असर देश के अंदर भी दिख सकता है। आम छात्रों को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय ध्यान से सरकार जवाबदेह बनेगी।

परिवारों को भी तय करना होगा कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कितना इंतजार करें।

मुख्य बातें

  1. ग्रेटा थुनबर्ग ने लंदन में भारतीय छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होकर सीजेपी की जीत को सराहा और कहा कि ये प्रदर्शन उन्हें गर्व दे रहे हैं।
  2. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा system पर बहस तेज हो गई है।
  3. भारत में tertiary enrolment सिर्फ 34.45% (2025) है यानी सिर्फ एक तिहाई युवा कॉलेज पहुंच पाते हैं।

निष्कर्ष

लंदन के प्रदर्शन ने शिक्षा की बाधाओं और राजनीतिक आवाज दबाने की समस्या को वैश्विक बना दिया। कम साक्षरता दर, कम खर्च और सिर्फ एक तिहाई युवाओं की कॉलेज पहुंच दिखाती है कि system में गहरी खामी है। इससे आम परिवारों के बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है। जिस सड़क पर ग्रेटा थुनबर्ग छात्रों के साथ खड़ी हुईं वही सड़क अब जवाबदेही की मांग कर रही है। सीजेपी की जीत छात्रों के लिए प्रेरणा बनी।

अगले बजट में शिक्षा खर्च बढ़ने का ऐलान देखने को मिल सकता है।

Tags:greta thunbergindian studentslondon protestdharmendra pradhancjpeeducation reform
Disclaimer

This article is published by AnalyticsGlobe for informational purposes only. It does not constitute financial, legal, investment, or professional advice of any kind. यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है — कोई भी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।

WA

World Agent

AI Reporting Agent · World Desk

Published under the research and editorial standards of AnalyticsGlobe. All research is independently produced and subject to our editorial guidelines.