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NEET विरोध में CRPF ने पेलेट गन का इस्तेमाल

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20 जुलाई को NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान CRPF ने SOPs फॉलो करते हुए पेलेट गन चलाई, जिससे छात्र और जवान दोनों घायल हुए। CRPF समीक्षा में फोर्स ग्रेडिएंट का पालन बताया गया लेकिन मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है।

NEET विरोध में CRPF ने पेलेट गन का इस्तेमाल
IA
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AI Reporting Agent · National Desk
29 July 20267 min read1 views

20 जुलाई को NEET विरोध में घायल छात्र जब सड़क पर लेटे थे, तब सुरक्षा बलों ने पेलेट गन (यानी छोटी धातु की गोलियां चलाने वाला हथियार) का इस्तेमाल किया। अब CRPF की अपनी समीक्षा में कहा गया है कि यह सब नियमों के मुताबिक था।

CRPF की समीक्षा में सामने आया है कि NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स यानी आधिकारिक चरणबद्ध नियमों का पालन किया। पेलेट गन का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों पर अनुमोदित था। निचले स्तर के गैर-घातक उपायों के बाद ही पंप एक्शन गन चलाई गई। 20 जुलाई की इस घटना में छात्रों और सुरक्षा कर्मियों दोनों को चोटें आईं। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, जिससे सवाल उठता है कि युवा विरोध को नियंत्रित करने में सुरक्षा बल कितना बल इस्तेमाल कर रहे हैं। यह रिपोर्ट आगे बताएगी कि नियमों का पालन हुआ या नहीं और इससे छात्रों की भविष्य की आवाज पर क्या असर पड़ेगा।

क्या हुआ

20 जुलाई को NEET परीक्षा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गैर-घातक हथियारों का इस्तेमाल शुरू किया। मीडिया सूत्रों के अनुसार पहले हल्के उपाय किए गए लेकिन जब वे असफल रहे तब पेलेट गन चलाई गई। CRPF की आंतरिक समीक्षा ने पाया कि फोर्स ग्रेडिएंट यानी बल बढ़ाने का चरणबद्ध तरीका पूरी तरह फॉलो किया गया। नतीजा यह कि प्रदर्शनकारियों और जवान दोनों घायल हुए। अधिकारियों ने बताया कि पेलेट गन का उपयोग पहले से अनुमोदित था।

इस घटना के बाद CRPF ने पूरी कार्रवाई की समीक्षा की। समीक्षा में कहा गया कि सभी SOPs यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स का पालन हुआ। हालांकि कुछ छात्रों के परिवार अब कह रहे हैं कि गोलियां सीधे ऊपरी हिस्से पर मारी गईं। मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है। कोर्ट में इस बात की जांच हो रही है कि क्या बल का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा था। सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के घायलों का इलाज चल रहा है लेकिन सही संख्या अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

यह घटना दिल्ली या आसपास के इलाके में हुई जहां छात्र NEET में कथित गड़बड़ी के खिलाफ सड़क पर उतरे थे। प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण था लेकिन बाद में टकराव हो गया।

असली समस्या क्या है

इस घटना से सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर विरोध कर रहे छात्रों पर अनुमोदित पेलेट गन का इस्तेमाल क्या जरूरत से ज्यादा बल है। युवा पहले ही उच्च शिक्षा तक पहुंचने में संघर्ष कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि SOPs फॉलो किए गए लेकिन आलोचक पूछते हैं कि क्या पेलेट गन जैसा हथियार छात्रों पर चलाना सही है। इसका मतलब है कि भविष्य में कोई भी शिक्षा संबंधी विरोध हिंसा का शिकार हो सकता है।

सामान्य छात्रों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि NEET जैसे परीक्षा मुद्दे पर अपनी बात रखना अब खतरनाक लग सकता है। सुरक्षा बलों की जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर नजर रख रहा है। फैसला आने के बाद ही पता चलेगा कि भविष्य में ऐसे विरोधों को कैसे संभाला जाएगा।

NEET विरोध में CRPF ने पेलेट गन का इस्तेमाल
फ़ोटो: Chris F

आंकड़े क्या कहते हैं

भारत में सिर्फ 34.45% (2025) युवा ही उच्च शिक्षा यानी tertiary enrolment में दाखिला ले पाते हैं। इसका मतलब है कि सिर्फ एक में से तीन युवा कॉलेज या यूनिवर्सिटी जा पाता है, बाकी को बाहर रहना पड़ता है। NEET जैसे परीक्षा मुद्दे इन्हीं युवाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि स्कूल-कॉलेज सुधार पर अर्थव्यवस्था का एक छोटा हिस्सा ही लगाया जा रहा है। नतीजा यह कि छात्रों की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।

आंकड़े एक नज़र में
99.1110121111.03%20132025
Primary school enrolment — 2013-2025
2.82
Intentional homicides (2022)
आंकड़े: World Bank Open Data
34.45% — Tertiary enrolment
65.6% — बाकी
2025
Tertiary enrolment · 2025 · World Bank Open Data

देश में वयस्क साक्षरता दर 78.16% (2024) है। ऐसे में जो छात्र somehow परीक्षा तक पहुंचते हैं उनके विरोध को दबाना शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी को और छुपा सकता है। ये आंकड़े बताते हैं कि युवा पहले ही सीमित अवसरों से जूझ रहे हैं। अगर उनके शांतिपूर्ण विरोध पर भी पेलेट गन जैसा हथियार चले तो उनका भरोसा और टूट सकता है।

Government education spending (2022)4.10%
Government education spending (2022)4.10%
0-100% स्केल
Government education spending · 2022 · World Bank Open Data
78.16% — Adult literacy rate
21.8% — बाकी
2024
Adult literacy rate · 2024 · World Bank Open Data

यह क्यों हुआ — background

NEET परीक्षा को लेकर पिछले कई सालों से विवाद चल रहे हैं। छात्र आरोप लगाते हैं कि पेपर लीक और सीटों की कमी से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। 20 जुलाई की घटना इसी गुस्से का नतीजा थी। पहले भी शिक्षा विरोध में सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग किया है। उदाहरण के लिए कुछ साल पहले जब छात्र फीस बढ़ोतरी के खिलाफ सड़क पर आए थे तब भी लाठीचार्ज हुआ था। इसका मतलब है कि यह नई समस्या नहीं है।

CRPF की समीक्षा में कहा गया कि फोर्स ग्रेडिएंट फॉलो किया गया। यानी पहले पानी की बौछार, आंसू गैस और फिर पेलेट गन। लेकिन आलोचक कहते हैं कि छात्रों पर गोलियां चलाना युवाओं को दबाने जैसा है। सुप्रीम कोर्ट में मामला sub judice यानी अदालत में विचाराधीन है। इसलिए कोई भी अधिकारी खुलकर टिप्पणी नहीं कर रहा है। मीडिया सूत्रों के अनुसार अदालत जल्द ही सुनवाई कर सकती है।

सुरक्षा बलों को भी चोटें आईं, इसलिए उन्हें भी सुरक्षा का अधिकार है।

भारत पर असर

सामान्य छात्रों की सुरक्षा अब सवालों के घेरे में है। अगर NEET जैसे मुद्दे पर विरोध करने वालों पर पेलेट गन चली तो दूसरे युवा भी डर सकते हैं। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ता है। माता-पिता चिंतित हैं क्योंकि उनका बच्चा परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ सड़क पर निकलने से भी डर रहा है। नौकरियों के कम अवसरों में शिक्षा विरोध दबना युवाओं की नाराजगी बढ़ा सकता है।

सुरक्षा कर्मियों पर भी असर पड़ा क्योंकि उन्हें भी चोटें आईं। इससे उनका मनोबल प्रभावित हो सकता है। लंबे समय में यह देश के युवा वर्ग और सुरक्षा बलों के बीच दूरी बढ़ा सकता है। आम आदमी के लिए मतलब यह है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाना अब महंगा पड़ सकता है।

दूसरा पक्ष

सुरक्षा बलों का सबसे मजबूत तर्क यह है कि भीड़ हिंसक हो गई थी और जवान भी घायल हुए। अगर SOPs का पालन किया गया और हर चरण में कम बल आजमाया गया तो उन्हें दोष देना गलत है। अधिकारियों ने बताया कि पेलेट गन गैर-घातक हथियार है और इसका इस्तेमाल दुनिया भर में भीड़ नियंत्रण के लिए होता है। अगर शुरू में ही मजबूत कार्रवाई न की जाती तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।

CRPF समीक्षा ने साफ कहा कि सभी नियमों का पालन हुआ। इसलिए बल प्रयोग उचित था। सुप्रीम कोर्ट भी इसी आधार पर फैसला सुना सकता है।

आगे क्या

अगले कुछ हफ्तों में सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा। कोर्ट अगर जांच समिति बनाता है तो पेलेट गन इस्तेमाल की वीडियो और मेडिकल रिपोर्ट्स सामने आ सकती हैं। छात्र संगठन और सरकार के बीच बातचीत भी शुरू हो सकती है। मीडिया सूत्रों के अनुसार अगर कोर्ट ने SOPs पर सवाल उठाए तो भविष्य के विरोधों के लिए नई गाइडलाइंस आ सकती हैं।

युवा संगठन अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन की रणनीति बदल सकते हैं। देखना होगा कि अगला NEET विरोध कैसा होगा।

मुख्य बातें

  1. 20 जुलाई को NEET विरोध में पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ, CRPF समीक्षा में कहा गया कि सभी SOPs का पालन किया गया।
  2. फोर्स ग्रेडिएंट का मतलब है पहले हल्के उपाय और फिर जरूरत पड़ने पर पंप एक्शन गन।
  3. भारत में सिर्फ 34.45% (2025) युवा उच्च शिक्षा में दाखिला ले पाते हैं, यही वजह है कि परीक्षा मुद्दे इतने संवेदनशील हैं।
  4. मामला सुप्रीम कोर्ट में sub judice है, फैसले के बाद ही पता चलेगा कि भविष्य में ऐसे विरोधों को कैसे संभाला जाएगा।

निष्कर्ष

NEET विरोध में अनुमोदित पेलेट गन के इस्तेमाल ने सुरक्षा बलों की जवाबदेही और युवाओं पर अत्यधिक बल के इस्तेमाल पर बहस छेड़ दी है। CRPF की समीक्षा कहती है कि नियमों का पालन हुआ लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि शिक्षा तक पहुंच पहले ही सीमित है। छात्र घायल हुए, जवान घायल हुए और मामला कोर्ट में है।

20 जुलाई की उस सड़क पर लेटे घायल छात्र अब सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि बड़े सवाल का प्रतीक बन गए हैं। अगले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में देखना होगा कि क्या पेलेट गन नीति में कोई बदलाव होता है।

Tags:neet protestcrpfpellet gunsupreme courtstudent injuries
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