Claude AI ने HAWK-256 पर Key Recovery Attack किया
Anthropic के Claude Mythos Preview ने HAWK-256 पर end-to-end key-recovery attack ढूंढ निकाला जो सिर्फ 3 घंटे 42 मिनट में पूरी कुंजी चुरा सकता है। साथ ही सात दौर वाले AES-128 पर 200-800 गुना तेज हमला भी किया, जो भारत के बैंक अकाउंट, आधार और सरकारी सेवाओं की post-quantum सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है।

आपके बैंक अकाउंट में पैसे, आधार कार्ड से जुड़ी पहचान और सरकारी वेबसाइट पर भरे फॉर्म — ये सब post-quantum cryptography (यानी क्वांटम कंप्यूटर के हमलों से बचने वाली सुरक्षा) पर टिके हैं। लेकिन Anthropic के Claude AI ने अब HAWK-256 पर पूरी कुंजी चुराने वाला हमला ढूंढ निकाला है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार Anthropic के Claude Mythos Preview ने HAWK-256 पर end-to-end key-recovery attack (यानी शुरू से अंत तक बिना मदद के कुंजी निकालने का तरीका) तैयार किया है और सात दौर वाले AES-128 पर 200 से 800 गुना तेज हमला भी खोजा है। यह खबर इसलिए मायने रखती है क्योंकि AI अब उन सुरक्षा दीवारों को तोड़ने में मदद कर रहा है जो आम भारतीयों के बैंकिंग, आधार और सरकारी सेवाओं को बचाती हैं। आगे यह रिपोर्ट बताएगी कि हमला कितना तेज है, यह आम आदमी की डिजिटल जिंदगी को कैसे छूता है और आगे क्या हो सकता है।
Claude AI ने क्या किया
अनthropic ने अपने Claude Mythos Preview मॉडल की मदद से दो बड़े cryptographic हमले निकाले। पहला HAWK-256 पर है, जो post-quantum digital signature scheme (यानी क्वांटम कंप्यूटर से बचने वाला सिग्नेचर सिस्टम) है। Claude ने lattice (यानी गणित की एक संरचना जिसमें बिंदु अंतरिक्ष में फैले होते हैं) के अंदर पहले अनुपयोगी symmetry (समरूपता) को पहचानकर इसका फायदा उठाया।
इस हमले का पूरा implementation Anthropic ने जारी कर दिया है। मीडिया सूत्रों के अनुसार 96-core server पर इसका expected end-to-end runtime करीब तीन घंटे 42 मिनट है। इतने कम समय में कुंजी निकल जाना post-quantum सुरक्षा के लिए बड़ा झटका है। दूसरा नतीजा सात दौर वाले AES-128 पर है। Claude ने इस पर 200 से 800 गुना speedup (यानी तेजी) दिया। AES-128 आज भी दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाला encryption standard (यानी डेटा को लॉक करने का आम तरीका) है।
2026 में यह खोज हुई। Anthropic का कहना है कि Claude ने बिना पहले से बताए रास्ते पर चलकर ये symmetries ढूंढीं। नतीजा यह कि अब हमलावर AI की मदद से बहुत तेजी से cryptographic schemes तोड़ सकते हैं। हालांकि ये अभी test schemes पर हुए हमले हैं, लेकिन इनसे असल दुनिया की सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं। Anthropic ने दोनों हमलों का कोड भी सार्वजनिक कर दिया ताकि शोधकर्ता और बेहतर सुरक्षा बना सकें।
असली समस्या क्या है
Advancing AI capabilities post-quantum cryptographic schemes को तेजी से तोड़ रही हैं। ये schemes उन digital दीवारों की तरह हैं जो बैंकिंग, आधार और सरकारी सेवाओं को सुरक्षित रखती हैं। Claude का हमला दिखाता है कि AI अब खुद नए हमले का रास्ता निकाल सकता है। इसका मतलब है कि कल को quantum computers के आने से पहले ही AI मदद से पुरानी सुरक्षा को चकनाचूर कर सकता है। आम भारतीयों के लिए यह खतरा इसलिए बड़ा है क्योंकि उनका बैंक ट्रांजेक्शन, आधार से जुड़ी पहचान और सरकारी पोर्टल इसी cryptography पर निर्भर हैं।
यही वजह है कि सुरक्षा विशेषज्ञ चिंतित हैं। अगर ये schemes जल्दी टूट गईं तो लाखों लोगों का डेटा चोरी हो सकता है। समस्या सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के डिजिटल जीवन की है।

आंकड़े क्या कहते हैं
यानी लगभग हर भारतीय के पास फोन है जो आधार verification, UPI पेमेंट और ई-गवर्नेंस सेवाओं के लिए इस्तेमाल होता है। अगर ये सुरक्षा टूटी तो मोबाइल पर रखा हर डेटा खतरे में पड़ जाएगा।
यह संख्या दिखाती है कि हमारी डिजिटल व्यवस्था कितनी बड़ी है लेकिन R&D spending 2020 में सिर्फ 0.65% of GDP पर अटकी हुई है, जिससे नई AI और quantum चुनौतियों से निपटने की तैयारी कमजोर है। ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या कितनी व्यापक है। जितने ज्यादा लोग इंटरनेट पर हैं, उतना ही बड़ा खतरा है अगर AI cryptographic schemes को तेजी से तोड़ने लगे।
यह क्यों हुआ — background
Post-quantum cryptography को इसलिए बनाया गया था ताकि quantum computers आने के बाद भी डेटा सुरक्षित रहे। लेकिन AI अब इन schemes को तोड़ने में मदद कर रहा है। Claude ने HAWK-256 के lattice में छिपी symmetry को पहचाना जो पहले किसी ने नहीं देखा था। एक concrete उदाहरण लें। 2016 में जब कुछ पुराने encryption तरीके कमजोर पड़े तो बैंकिंग सिस्टम को अपग्रेड करने में सालों लग गए। आज AI की वजह से वैसी ही प्रक्रिया बहुत तेज हो गई है। Claude Mythos Preview ने कुछ ही समय में वो काम कर दिखाया जो इंसान शोधकर्ताओं को महीनों लगते।
इसका मतलब है cryptographic research की गति बढ़ गई है। लेकिन अच्छी बात यह भी है कि Anthropic ने हमले का कोड जारी कर दिया। इससे सुरक्षा कंपनियां पहले से तैयारी कर सकती हैं। हालांकि चुनौती यह है कि AI हर बार नया रास्ता ढूंढ लेता है। भारत जैसे देश में जहां R&D spending कम है, वहां ये तेज बदलाव और भी मुश्किल बना देते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों को अब AI और quantum दोनों खतरे एक साथ देखने होंगे।
भारत पर असर
आम भारतीयों के बैंक खाते अब खतरे में पड़ सकते हैं। अगर post-quantum schemes टूट गईं तो UPI ट्रांजेक्शन और नेट बैंकिंग की सुरक्षा कमजोर हो जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि बचत पर हमला हो सकता है। आधार कार्ड से जुड़ी पहचान भी प्रभावित होगी। लाखों लोगों की डिजिटल आईडी अगर compromise हुई तो फर्जी दावे, लोन फ्रॉड और पहचान चोरी बढ़ सकती है। सरकारी सेवाएं जैसे आयकर फाइलिंग, पेंशन और सब्सिडी पोर्टल भी असुरक्षित हो सकते हैं।
मोबाइल पर भरोसा करने वाले 79.35 subscriptions वाले देश में यह खतरा हर किसी तक पहुंचेगा। सुरक्षा बढ़ाने के लिए बैंक और सरकार को जल्दी नए तरीके अपनाने होंगे। आम आदमी को मजबूत पासवर्ड, दो-तरफा वेरिफिकेशन और नियमित अपडेट पर ध्यान देना चाहिए।
दूसरा पक्ष
कई विशेषज्ञ कहते हैं कि यह खबर असल में अच्छी है। Anthropic ने हमले को सार्वजनिक किया है जिससे शोधकर्ता कमजोरियों को पहले ही ठीक कर सकते हैं। इससे सुरक्षा और मजबूत बनेगी। वे तर्क देते हैं कि test schemes पर हुए ये हमले असल दुनिया के सिस्टम को तुरंत नहीं तोड़ेंगे। बल्कि ये हमें तैयार होने का समय देते हैं। AI का इस्तेमाल सुरक्षा बनाने में भी हो सकता है। नतीजा यह कि cryptographic standards को समय रहते अपग्रेड किया जा सकता है।
इसके अलावा post-quantum schemes अभी विकास के शुरुआती दौर में हैं। Claude का काम उन्हें और बेहतर बनाने में मदद करेगा। इसलिए कुछ लोग इसे खतरे के बजाय प्रगति मानते हैं।
आगे क्या
अगले कुछ हफ्तों में cryptographic समुदाय इन हमलों का और अध्ययन करेगा। Anthropic के जारी कोड को कई टीमें टेस्ट करेंगी। भारत सरकार और RBI को अपनी डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा की समीक्षा करनी होगी। नए post-quantum standards को अपनाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। कंपनियां अपने सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए समय मांगेंगी। आम उपयोगकर्ताओं को दो-चरणीय प्रमाणीकरण (2FA) का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए।
शोधकर्ता नए AI टूल्स से और हमले खोजने की कोशिश करेंगे। नतीजा यह कि cryptographic रेस और तेज हो गई है। भारत को R&D पर खर्च बढ़ाकर इस दौड़ में शामिल होना होगा।
मुख्य बातें
- Anthropic के Claude Mythos Preview ने HAWK-256 पर पूरी कुंजी निकालने वाला हमला तैयार किया जो तीन घंटे 42 मिनट में काम करता है।
- साथ ही सात दौर वाले AES-128 पर 200 से 800 गुना तेज हमला भी खोजा गया, जो आम encryption को चुनौती देता है।
- हालांकि हमले सार्वजनिक किए गए हैं, इसलिए सुरक्षा कंपनियां इन्हें ठीक करने का मौका पा रही हैं।
निष्कर्ष
Claude AI ने post-quantum सुरक्षा की दीवार में बड़ा सुराख कर दिया है। HAWK-256 पर तीन घंटे 42 मिनट का हमला और AES पर सैकड़ों गुना तेजी दिखाती है कि AI cryptographic schemes को कितनी तेजी से तोड़ रहा है।
जिस तरह शुरुआत में आपके बैंक अकाउंट, आधार और सरकारी फॉर्म की सुरक्षा का जिक्र था, वही अब हिल गई है। लेकिन Anthropic ने हमले का कोड जारी कर आगे की तैयारी का रास्ता भी खोल दिया। आम आदमी को अगले कुछ महीनों में दो-तरफा वेरिफिकेशन और अपडेटेड ऐप्स का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए।
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