CISA ने जारी की OT सिस्टम isolation गाइडलाइंस
CISA और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर critical infrastructure के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं जिसमें OT सिस्टम को साइबर हमले के दौरान isolate करने की तैयारी करने को कहा गया है। भारत में Access to electricity 99.90% (2024) पहुंच चुका है लेकिन OT सिस्टम की तैयारी कमजोर है जिससे ब्लैकआउट का खतरा बढ़ गया है।

जिस देश में बिजली का कनेक्शन 99.90 प्रतिशत लोगों के घर तक पहुंच चुका है, वहां अगर कोई साइबर हमला बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ठप कर दे तो क्या होगा? अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नई सलाह ने ठीक यही सवाल भारत के सामने रख दिया है।
अमेरिका की CISA यानी साइबर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा एजेंसी ने ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इनमें कहा गया है कि महत्वपूर्ण सुविधाओं को चलाने वाली operational technology systems यानी OT सिस्टम (जो बिजली, पानी और मशीनों जैसे भौतिक कामों को नियंत्रित करते हैं) को साइबर हमले के दौरान अलग कर देने की तैयारी करनी चाहिए। मीडिया सूत्रों के अनुसार यह सलाह उन संगठनों के लिए है जो देश की रीढ़ माने जाने वाले critical infrastructure यानी बिजली, परिवहन और अस्पताल जैसी जरूरी सेवाओं को चलाते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर हमला होता है तो पूरा सिस्टम बर्बाद होने से बच सकता है। आम भारतीयों के लिए यह मायने रखता है क्योंकि बिजली, इंटरनेट और ट्रेन जैसी चीजें रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। यह रिपोर्ट आगे बताएगी कि भारत में तैयारी कितनी कम है और इसका आम आदमी पर क्या असर पड़ सकता है।
क्या हुआ
CISA ने हाल ही में नई सलाह जारी की है। इसमें critical infrastructure संगठनों को OT सिस्टम को अलग करने की तैयारी करने को कहा गया है। यह सलाह साइबर हमले या किसी बड़े व्यवधान के समय के लिए है। मीडिया सूत्रों के अनुसार अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सरकारों ने साथ मिलकर यह गाइडलाइंस बनाई हैं। इसका मकसद है कि हमला होने पर वायरस या हैकर दूसरे हिस्सों तक न फैल पाएं। OT सिस्टम को isolate यानी अलग करने का मतलब है पूरे नेटवर्क से उसे काट देना ताकि हमला रुक जाए।
यह सलाह उन जगहों के लिए है जहां बिजली बनाना, पानी सप्लाई करना या ट्रेन चलाना जैसे काम होते हैं। अगर ये सिस्टम संक्रमित हो जाएं तो पूरे शहर अंधेरे में जा सकते हैं। इसलिए पहले से प्लान बनाना जरूरी बताया गया है। हालांकि भारत में अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं आई है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते साइबर हमलों को देखते हुए भारत को भी इसी तरह की तैयारी करनी चाहिए। नतीजा यह कि अगर तैयारी नहीं हुई तो छोटा हमला भी बड़े नुकसान का कारण बन सकता है।
इस गाइडेंस में बताया गया है कि अलग करने की प्रक्रिया कितनी जल्दी शुरू करनी चाहिए। साथ ही यह भी कि बाद में सिस्टम को दोबारा जोड़ने का तरीका क्या होना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि कई देशों में हाल के हमलों ने यही सबक दिया है।
असली समस्या क्या है
भारत की critical infrastructure अभी भी साइबर हमलों के सामने कमजोर है क्योंकि OT सिस्टम को अलग करने की तैयारी पर्याप्त नहीं है। इसका मतलब है कि अगर कोई हमला होता है तो बिजली का ग्रिड, पानी की सप्लाई या ट्रेन नेटवर्क पूरी तरह ठप हो सकता है। आम आदमी के लिए यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि लगभग हर भारतीय बिजली पर निर्भर है। अगर OT सिस्टम अलग नहीं किए गए तो ब्लैकआउट कई दिनों तक चल सकता है। इसी तरह इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं।
दरअसल OT सिस्टम वे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर हैं जो फैक्ट्री मशीनों या बिजली प्लांट को नियंत्रित करते हैं। इन्हें आम आईटी सिस्टम से अलग रखना चाहिए लेकिन भारत में कई जगह दोनों जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि एक छोटा वायरस पूरे सिस्टम को जाम कर सकता है। नतीजा यह कि बिना तैयारी के हमला होने पर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी रुक जाएगी। अस्पतालों में मशीनें बंद हो सकती हैं। पानी की पंपिंग बंद हो सकती है। इसलिए CISA की इस सलाह को भारत के लिए भी चेतावनी माना जा रहा है।

आंकड़े क्या कहते हैं
इसका मतलब है कि ज्यादातर आम भारतीय ऑनलाइन हैं लेकिन critical systems को isolate करने की तैयारी अभी भी कम है। यानी लगभग हर भारतीय के पास मोबाइल है। इससे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता बढ़ गई है जो साइबर हमले की स्थिति में बिना isolation प्लान के आसानी से प्रभावित हो सकती है।
2024 में बिजली पहुंच 99.90 प्रतिशत आबादी तक हो चुकी है। इसका सीधा मतलब है कि करीब हर घर बिजली ग्रिड पर निर्भर है। अगर OT सिस्टम को साइबर हमले के दौरान अलग नहीं किया गया तो ये ग्रिड लंबे समय तक बंद रह सकते हैं। 2020 में भारत ने अपने GDP का सिर्फ 0.65 प्रतिशत R&D पर खर्च किया। यह कम निवेश cybersecurity को मजबूत बनाने वाले रिसर्च में बाधा डालता है। नतीजा यह कि OT सिस्टम को सुरक्षित रखने वाली नई तकनीकें विकसित करने की रफ्तार धीमी रहती है।
यह संख्या दर्शाती है कि vital infrastructure को बचाने के लिए सुरक्षित सर्वर क्षमता अभी काफी सीमित है। 2021 में renewable energy का हिस्सा 34.90 प्रतिशत था। इन स्रोतों के OT सिस्टम को भी isolation प्लान की जरूरत है वरना साइबर हमला पूरे पावर सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।
यह क्यों हुआ — background
पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में critical infrastructure पर साइबर हमले बढ़े हैं। कई बार हमलावरों ने OT सिस्टम को निशाना बनाया क्योंकि ये भौतिक दुनिया को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए जब कोई पावर प्लांट का सॉफ्टवेयर संक्रमित होता है तो बिजली कटौती हो जाती है। भारत में भी बैंकिंग, रेलवे और पावर सेक्टर पर हमले हो चुके हैं। हालांकि OT सिस्टम को अलग करने की व्यवस्थित तैयारी अभी ज्यादातर जगहों पर नहीं है। इसका कारण कम निवेश और पुरानी तकनीक हो सकती है।
एक रोजमर्रा की तुलना करें तो जैसे घर में आग लगने पर मुख्य स्विच ऑफ करके बाकी हिस्से बचाते हैं वैसे ही OT सिस्टम को isolate करना है। लेकिन भारत में कई critical सिस्टम अभी भी एक ही नेटवर्क पर चलते हैं। यही वजह है कि CISA की सलाह भारत के लिए भी प्रासंगिक है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार पिछले वर्षों में ransomware हमलों ने कई देशों में पावर और पानी की सप्लाई को प्रभावित किया। इसलिए अब सरकारें पहले से isolation प्लान बनाने पर जोर दे रही हैं। भारत को भी अपनी critical infrastructure की समीक्षा करनी होगी।
साइबर हमलों से बचने के लिए vital systems को समय रहते अलग करने की क्षमता हर critical infrastructure संगठन में होनी चाहिए।
भारत पर असर
आम भारतीयों पर इसका सीधा असर बिजली, इंटरनेट और परिवहन पर पड़ सकता है। अगर OT सिस्टम isolate नहीं किए गए तो बिजली गुल होने पर घरों में अंधेरा छा जाएगा। मोबाइल और इंटरनेट बंद होने से काम-धंधा रुक सकता है। ट्रांसपोर्ट नेटवर्क प्रभावित होने पर लोग ऑफिस या अस्पताल नहीं पहुंच पाएंगे। इससे रोजगार और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी। परिवारों की बचत भी प्रभावित हो सकती है क्योंकि बिजनेस रुकने से आय कम हो जाएगी।
अगर supporting infrastructure segmented यानी अलग नहीं किया गया तो लाखों घरों की कनेक्टिविटी कई दिनों तक चली जाएगी। यही वजह है कि तैयारी की कमी आम आदमी की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।
दूसरा पक्ष
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि isolation प्लान बनाना आसान नहीं है। OT सिस्टम को अचानक अलग करने से रोजाना के काम भी रुक सकते हैं। इससे उद्योगों का प्रोडक्शन प्रभावित होता है। इसलिए कई कंपनियां इसे अंतिम विकल्प मानती हैं। इसके अलावा isolation के बाद सिस्टम को दोबारा जोड़ने में समय लगता है। अगर गलत तरीके से किया गया तो नया खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए कुछ लोग कहते हैं कि बेहतर साइबर सुरक्षा उपाय जैसे मजबूत फायरवॉल और ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
हालांकि सबसे मजबूत तर्क यह है कि isolation की क्षमता होने से हमला फैलने से रोका जा सकता है। इससे लंबे समय में नुकसान कम होता है।
आगे क्या
अगले कुछ हफ्तों में भारत सरकार और उद्योग संगठनों को CISA की गाइडलाइंस का अध्ययन करना चाहिए। मीडिया सूत्रों के अनुसार जल्द ही भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसियां भी इसी तरह की सलाह जारी कर सकती हैं। कंपनियों को अपने OT सिस्टम की समीक्षा शुरू कर देनी चाहिए। isolation प्लान का टेस्ट करने के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की जा सकती हैं। आम लोगों को भी अपने घरेलू डिवाइस को अपडेट रखना चाहिए ताकि छोटे हमलों से बड़ा नुकसान न हो।
अगर भारत ने समय रहते तैयारी कर ली तो critical infrastructure ज्यादा सुरक्षित हो सकेगी।
मुख्य बातें
- CISA ने OT सिस्टम को साइबर हमले के दौरान isolate करने की सलाह दी है ताकि हमला पूरे नेटवर्क में न फैले।
- भारत में 99.90 प्रतिशत लोगों के पास 2024 में बिजली पहुंच है लेकिन isolation तैयारियां कमजोर हैं।
- आम भारतीयों को लंबे ब्लैकआउट और सेवा रुकावट का खतरा है अगर critical systems अलग न किए गए।
निष्कर्ष
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नई गाइडलाइंस ने साफ कर दिया है कि critical infrastructure को साइबर हमलों से बचाने के लिए OT सिस्टम को अलग करने की तैयारी जरूरी है। भारत में बढ़ती डिजिटल निर्भरता के बावजूद isolation प्लान की कमी एक बड़ी कमजोरी बनी हुई है। आंकड़े बताते हैं कि बिजली, इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर लगभग हर परिवार निर्भर है।
जिस देश में बिजली पहुंच 99.90 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है वहां एक साइबर हमला पूरे इलाके को अंधेरे में डुबो सकता है। इसलिए अब समय आ गया है कि सरकार और कंपनियां इस पर गंभीरता से काम करें। आम पाठक को अगले महीने जारी होने वाली भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसियों की किसी भी नई सलाह पर नजर रखनी चाहिए।
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