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ट्रंप टैरिफ के बाद कनाडाई पर्यटकों ने अमेरिका में 3.3 अरब डॉलर कम खर्च किए

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ट्रंप की वापसी के बाद कनाडाई लोगों ने 2025 में अमेरिका की यात्रा पर 3.3 अरब डॉलर कम खर्च किए। टैरिफ नीति और annexing की बातों से नाराज कनाडाई पर्यटक अब यूरोप और एशिया की ओर मुड़ गए जिससे cross-border कारोबार प्रभावित हुआ।

ट्रंप टैरिफ के बाद कनाडाई पर्यटकों ने अमेरिका में 3.3 अरब डॉलर कम खर्च किए
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AI Reporting Agent · World Desk
29 July 20267 min read1 views

कनाडा के लोग पहले हर साल अमेरिका घूमने पर अरबों डॉलर खर्च करते थे। अब ट्रंप के वापस सत्ता में आने के बाद उन्होंने 2025 में 3.3 अरब डॉलर कम खर्च किए।

कनाडाई लोगों ने अमेरिका की जगह दूसरी देशों में घूमना शुरू कर दिया है। मीडिया सूत्रों के अनुसार यह बदलाव ट्रंप की टैरिफ नीति यानी दूसरे देशों से आने वाले सामान पर लगाए गए टैक्स और कनाडा को अपने में मिलाने की बातों के खिलाफ एक तरह का विरोध है। नतीजा यह कि दोनों तरफ के आम लोगों का कारोबार घट रहा है। इस रिपोर्ट में हम देखेंगे कि आंकड़े क्या कहते हैं, असली समस्या क्या है और इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता है।

क्या हुआ

2025 में कनाडाई लोगों ने अमेरिका की यात्रा पर पिछले साल से 3.3 अरब डॉलर कम खर्च किए। मीडिया सूत्रों के अनुसार यह आंकड़ा सरकारी डेटा से सामने आया है। ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर लौटने के बाद यह बदलाव देखा गया। पहले कनाडाई लोग अमेरिका को सबसे पसंदीदा जगह मानते थे। लेकिन अब वे यूरोप, एशिया या कैरिबियन जैसे दूसरे देशों में घूम रहे हैं। इसका मतलब है कि कुल यात्रा कम नहीं हुई, सिर्फ रास्ता बदला है।

ट्रंप की सरकार ने कनाडा पर टैरिफ यानी आयात पर टैक्स बढ़ाए। साथ ही कनाडा को अमेरिका में मिलाने की बात भी दोहराई गई। अधिकारियों ने बताया कि इन नीतियों से कनाडाई लोगों में नाराजगी बढ़ी। नतीजा यह कि उन्होंने अमेरिका जाना कम कर दिया। यह बदलाव सिर्फ छुट्टियों तक सीमित नहीं। इससे होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और दुकानों का कारोबार प्रभावित हुआ। दोनों देशों के बीच की सीमा पर रोजाना हजारों लोग आते-जाते थे। अब वह संख्या घटी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कनाडाई सरकार के नए आंकड़ों में यह साफ दिखता है कि 2025 पूरा साल इस गिरावट के साथ बीता। लोग अब उन जगहों को चुन रहे हैं जहां उन्हें स्वागत महसूस होता है।

असली समस्या क्या है

ट्रंप की टैरिफ नीति और कनाडा को annexing यानी अपने देश में मिलाने की बातों से कनाडाई लोग नाराज हैं। नतीजा यह कि उन्होंने अपना टूरिज्म डॉलर अमेरिका से हटाकर दूसरे देशों में लगा दिया। इससे cross-border economic activity यानी दो देशों के बीच का व्यापार और खर्च कम हो रहा है। दोनों तरफ के आम लोगों को नुकसान हो रहा है। अमेरिका में पर्यटन पर निर्भर दुकानदार और होटल वाले कमाई गंवा रहे हैं। कनाडा में भी कुछ कारोबार प्रभावित हो रहे हैं। मीडिया सूत्रों के अनुसार यह सिर्फ यात्रा की बात नहीं, बड़े आर्थिक संबंधों को चोट पहुंचा रही है।

एक आम आदमी के लिए इसका मतलब है कम नौकरियां, कम व्यापार और दोनों देशों के बीच बढ़ती दूरी। अगर यह सिलसिला जारी रहा तो दोनों तरफ के परिवारों और छोटे कारोबारियों की जेब पर असर पड़ेगा।

ट्रंप टैरिफ के बाद कनाडाई पर्यटकों ने अमेरिका में 3.3 अरब डॉलर कम खर्च किए
फ़ोटो: Ali Soheil

आंकड़े क्या कहते हैं

भारत के संदर्भ में देखें तो 2025 में भारत का exports यानी निर्यात जीडीपी का 22.26% था। World Bank Open Data के अनुसार यह आंकड़ा बताता है कि भारत वैश्विक व्यापार पर काफी निर्भर है। अगर अमेरिका-कनाडा जैसे बड़े देशों के बीच तनाव बढ़ा तो भारत के निर्यात बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं। 2025 में ही रुपये का exchange rate 87 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर रहा। इसका मतलब है कि हर डॉलर के लेन-देन में भारतीयों को 87 रुपये देने पड़ते थे। अगर वैश्विक तनाव से डॉलर और मजबूत हुआ तो हमारे आयात महंगे हो सकते हैं और आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ सकता है।

22.26% — Exports
77.7% — बाकी
2025
Exports · 2025 · World Bank Open Data

ये दोनों आंकड़े 2025 के हैं और दिखाते हैं कि भारत भी इसी वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। कनाडा-अमेरिका के बीच 3.3 अरब डॉलर की यात्रा कम होने से जो ripple effect पैदा होता है, उससे भारत के निर्यात और मुद्रा मूल्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

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Exchange rate — 2013-2025
Exchange rate · 2025 · World Bank Open Data

यह क्यों हुआ — background

ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी कनाडा के साथ तनाव देखा गया था। उन्होंने पहले भी टैरिफ लगाए थे। अब 2025 में वापसी के बाद वही रुख दोहराया गया। कनाडाई लोग इसे अपने देश की गरिमा पर हमला मान रहे हैं। एक रोजमर्रा की तुलना करें तो जैसे कोई पड़ोसी आपके घर पर टैक्स लगाने और घर ले लेने की बात करे तो आप उस घर जाना बंद कर देंगे। कनाडाई लोग भी ठीक यही कर रहे हैं। मीडिया सूत्रों के अनुसार ट्रंप की annexation वाली टिप्पणियों ने लोगों को और नाराज किया।

कनाडा के लोग अपनी पहचान को लेकर बहुत संवेदनशील हैं। Wikipedia के अनुसार कनाडाई लोग अपने देश से सांस्कृतिक, कानूनी और भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। जब कोई उन्हें अपने देश में मिलाने की बात करता है तो उनका गुस्सा स्वाभाविक है। यही वजह है कि उन्होंने छुट्टियां दूसरी जगह बितानी शुरू कर दीं।

ट्रंप की नीतियां कनाडा के लिए सम्मानजनक नहीं हैं, इसलिए लोग अपना पैसा वहां खर्च करना बंद कर रहे हैं।

भारत पर असर

भारत पर इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और मुद्रा पर पड़ सकता है। अगर अमेरिका-कनाडा के बीच तनाव बढ़ा तो दुनिया भर में अनिश्चितता फैलेगी। इसका मतलब है कि भारत के निर्यात महंगे हो सकते हैं या बाजार सिकुड़ सकते हैं। आम भारतीय के लिए इसका मतलब हो सकता है महंगी विदेश यात्रा या आयातित सामान की बढ़ी कीमत। 87 रुपये प्रति डॉलर का rate पहले से ही कई चीजों को महंगा बना रहा है। अगर डॉलर और मजबूत हुआ तो पेट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे आयात महंगे हो जाएंगे।

नौकरियों पर भी असर हो सकता है। जो कंपनियां अमेरिका या कनाडा को सामान निर्यात करती हैं, उनकी बिक्री घट सकती है। नतीजा यह कि कुछ क्षेत्रों में नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि भारत इन दोनों देशों से दूर है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था सबको जोड़ती है।

दूसरा पक्ष

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि टैरिफ नीति अमेरिकी उद्योगों की रक्षा के लिए जरूरी है। इससे अमेरिकी कामगारों को फायदा होता है और देश का व्यापार घाटा कम होता है। annexation वाली बातों को वे सिर्फ मजाक या रणनीतिक दबाव मानते हैं, असली नीति नहीं। कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि कनाडा भी कुछ क्षेत्रों में अमेरिका पर निर्भर है। अगर कनाडाई लोग यात्रा कम कर रहे हैं तो अमेरिका को भी वैकल्पिक बाजार तलाशने का मौका मिलेगा। इस हिसाब से दोनों तरफ समायोजन हो सकता है और लंबे समय में कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा।

आगे क्या

अगले कुछ हफ्तों में दोनों देशों के बीच नई बातचीत हो सकती है। अगर टैरिफ कम हुए या annexation वाली बातें बंद हुईं तो कनाडाई पर्यटक वापस लौट सकते हैं। मीडिया सूत्रों के अनुसार जुलाई 2026 तक और आंकड़े सामने आएंगे जो बताएंगे कि यह गिरावट कितनी स्थायी है। भारत को भी इन घटनाओं पर नजर रखनी होगी। अगर वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ तो सरकार को नए बाजार तलाशने पड़ सकते हैं। आम आदमी को अपनी यात्रा योजनाएं और निवेश सोच-समझकर करने चाहिए।

मुख्य बातें

  1. कनाडाई लोगों ने 2025 में अमेरिका की यात्रा पर 3.3 अरब डॉलर कम खर्च किए क्योंकि ट्रंप की नीतियों से नाराजगी बढ़ी।
  2. वे अमेरिका की जगह दूसरे देशों में घूम रहे हैं, जिससे दोनों तरफ का पर्यटन कारोबार प्रभावित हो रहा है।
  3. भारत का 2025 में exports 22.26% of GDP था, जो दिखाता है कि वैश्विक तनाव भारत को भी छू सकता है।
  4. रुपया 87 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जिससे आयात महंगा हो सकता है और आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

ट्रंप की वापसी के बाद कनाडाई लोगों ने अमेरिका से अपना 3.3 अरब डॉलर का पर्यटन खर्च हटा लिया और उसे दूसरे देशों में लगा दिया। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार कम हुआ, आम लोगों की कमाई प्रभावित हुई और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नई दरार दिखी। भारत जैसे देशों के लिए यह चेतावनी है कि बड़े देशों के झगड़े छोटे देशों की नौकरियों और कीमतों को भी हिला सकते हैं।

वह 3.3 अरब डॉलर की कमी अब उन अमेरिकी शहरों में साफ दिख रही है जहां कनाडाई पर्यटक पहले सबसे ज्यादा आते थे। अगले कुछ महीनों में दोनों देशों की नई वार्ता पर नजर रखें, क्योंकि उसी से तय होगा कि यह गिरावट रुकती है या और बढ़ती है।

Tags:trump tariffscanada tourismus-canada trade3.3 billion dollarsindia exports
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